एक्सप्रेस-वे बदलेंगे मप्र की तस्वीर

एक्सप्रेस-वे
  • उद्योग-रोजगार में आएगा बूम, किसानों को फायदा ही फायदा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मप्र के सर्वांगीण विकास का जो खाका तैयार किया है, उसको अमली जामा भी पहनाया जा रहा है। इस कड़ी में मप्र में अधोसंरचना और औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई देने के लिए इकोनॉमी कॉरिडोर मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। ये न केवल परिवहन को गति दे रहे हैं, बल्कि निवेश और रोजगार के विशाल अवसर भी उत्पन्न कर रहे हैं।

विनोद कुमार उपाध्याय/बिच्छू डॉट कॉम
भोपाल (डीएनएन)।
मप्र की सडक़ों पर रफ्तार और विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। एक्सप्रेस-वे और इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश की तस्वीर बदलने का अभियान शुरू हो गया है। इससे जहां उद्योग-रोजगार में बूम आ रहा है, वहीं किसानों को फायदा ही फायदा हो रहा है। एक्सप्रेस-वे और इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से राज्य में ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एग्री-प्रोसेसिंग और वेयरहाउसिंग सेक्टर को भारी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, किसानों को भूमि के बदले 4 गुना मुआवजा और 60 प्रतिशत विकसित जमीन वापस देने जैसी योजनाएं स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर औद्योगिक विकास का भागीदार बना रही हैं। इन कॉरिडोर के माध्यम से सरकार का लक्ष्य 2047 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 164 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर $2.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। मप्र के विकास को नई रफ्तार देने के लिए सरकार सभी 55 जिलों की तस्वीर बदलने और उनके बीच की दूरी को कम करने के लिए एक मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। राज्य में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारे) तैयार किए जा रहे हैं, जो करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। लगभग 36,483 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे ग्रिड का निर्माण कार्य साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह महापरियोजना न केवल सफर को आसान बनाएगी, बल्कि विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल की आर्थिक रीढ़ को भी मजबूत करेगी। बालाघाट से बैतुल तक और बिलासपुर-रायपुर से होते हुए गुजरात सीमा तक कनेक्टिविटी का यह जाल प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जानकारी के लिए मालवा और निमाड़ अंचल को आर्थिक रूप से और समृद्ध बनाने के लिए मालवा-निमाड़ विकासपथ (कुल लंबाई 450 किमी) को 7,972 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके तहत गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किलोमीटर और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किलोमीटर का रूट शामिल है। साल 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को सीधे जोड़ेगा। वहीं विंध्य एक्सप्रेस-वे (कुल लंबाई 676 किमी) को करीब 3,809 करोड़ रुपये के बजट से बनाया जा रहा है। यह एक्सप्रेस-वे राजधानी भोपाल से शुरू होकर प्रदेश के 10 जिलों से गुजरेगा। इसमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे बड़े शहर शामिल हैं। इसके पूरी तरह चालू हो जाने के बाद भोपाल से रीवा और ऊर्जा धानी सिंगरौली तक का सफर बेहद आसान और बेहद कम समय में तय होने लगेगा। बुंदेलखंड क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बुंदेलखंड विकासपथ (कुल लंबाई 330 किमी) यानी कॉरिडोर बनाया जा रहा है। लगभग 3,357 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पथ भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को आपस में जोड़ेगा, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को रफ्तार मिलेगी। चंबल अंचल के विकास को रफ्तार देने के लिए 299 किलोमीटर लंबे अटल प्रगतिपथ की रूपरेखा तैयार की गई है। यह कॉरिडोर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से जाकर मिल जाएगा। इससे श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को सीधा फायदा होगा और यहां नए उद्योगों के रास्ते खुलेंगे। वहीं नर्मदा नदी के समानांतर 867 किलोमीटर का नर्मदा प्रगतिपथ बनाया जा रहा है। यह मार्ग झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को एक सूत्र में पिरोएगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मप्र के रास्ते सीधे गुजरात की सीमाओं से जोड़ देगा। वहीं मध्यभारत विकासपथ विशेष रूप से मप्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने के लिए डिजाइन किया गया है। 746 किलोमीटर लंबा यह मार्ग भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, इस कॉरिडोर के जरिए मुरैना से लेकर बैतुल तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

10 जिलों से होकर गुजरेगा विंध्य एक्सप्रेस-वे
विंध्य एक्सप्रेस-वे से भोपाल सीधे सिंगरौली और रीवा से जुड़ जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे भोपाल से होते हुए सागर, दमोह, कटनी और रीवा के साथ 10 जिलों से होकर गुजरेगा। इसकी कुल लंबाई 676 किमी रहेगी और इस प्रोजेक्ट की लागत 3,809 करोड़ रूपए आने की उम्मीद है। मप्र और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाला विंध्य एक्सप्रेस-वे अब देश के सबसे बड़े सडक़ नेटवर्क में शामिल होने जा रहा है। प्रस्तावित 676 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे भोपाल से शुरू होकर सिंगरौली तक जाएगा। आगे प्रयागराज में गंगा एक्सप्रेस-वे से जुडऩे का प्रस्ताव है। इसके पूरा होने के बाद विंध्य क्षेत्र से दिल्ली-एनसीआर तक का सफर महज 8 से 9 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। करीब 676 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे भोपाल से शुरू होकर सिंगरौली तक पहुंचेगा। आगे इसे प्रयागराज में गंगा एक्सप्रेस-वे से जोडऩे की योजना है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद विंध्य क्षेत्र के लोगों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सडक़ नेटवर्क का लाभ मिलेगा। साथ ही दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचने का समय भी काफी कम हो जाएगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक बनेगी। विंध्य एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज में गंगा एक्सप्रेस-वे से जोडऩे का प्रस्ताव क्षेत्रीय विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अभी विंध्य क्षेत्र के लोगों को उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने के लिए भारी ट्रैफिक और लंबी यात्रा का सामना करना पड़ता है। नई योजना लागू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि उत्तर प्रदेश और मप्र के बीच आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। बेहतर सडक़ संपर्क दोनों राज्यों के विकास को मजबूत आधार प्रदान करेगा। प्रस्तावित रूट प्रयागराज से आगे जौनपुर, भदोही, वाराणसी, मीरजापुर, चंदौली और सोनभद्र तक विस्तारित किया जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, मध्यांचल और पश्चिमांचल क्षेत्रों को विंध्य क्षेत्र से सीधे जोडऩे का काम करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण लाखों लोगों को तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही क्षेत्रीय व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन गतिविधियों को भी नई ताकत मिलेगी। यह सडक़ नेटवर्क आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के महत्वपूर्ण परिवहन गलियारों में अपनी पहचान बना सकता है। विंध्य एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे के जुडऩे से दिल्ली-एनसीआर तक का सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा। अनुमान है कि विंध्य क्षेत्र से राजधानी क्षेत्र तक की दूरी केवल 8 से 9 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और सडक़ परिवहन अधिक सुरक्षित बनेगा। लंबे समय से बेहतर सडक़ संपर्क की मांग कर रहे लोगों के लिए यह परियोजना किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। विंध्य क्षेत्र खनिज, कोयला और ऊर्जा संसाधनों के लिए देशभर में जाना जाता है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद इन संसाधनों का परिवहन पहले से अधिक तेज और किफायती हो सकेगा। उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत में कमी आने की संभावना है। तेज परिवहन नेटवर्क निवेशकों को भी आकर्षित करेगा और नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सडक़ परियोजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संबंधित जिलों में लेआउट प्लान तैयार करने और जमीन अधिग्रहण की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सर्वे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि और अन्य संसाधनों की जानकारी जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए। सर्वे और प्रारंभिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। इससे परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन की उम्मीद बढ़ गई है। इस एक्सप्रेस-वे से मप्र के रीवा, सतना, शहडोल, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, वाराणसी, मीरजापुर और सोनभद्र क्षेत्रों के लोगों के लिए भी यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग साबित होगा। बेहतर सडक़ नेटवर्क से कृषि उत्पादों की आवाजाही आसान होगी, व्यापार को गति मिलेगी और पर्यटन क्षेत्र में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच दूरी कम होने से विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मालवा-निमाड़ विकासपथ
मालवा-निमाड़ विकासपथ इससे मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर सीधे जुड़ जाएंगे। इसके लिए गरोठ और उज्जैन के बीच 136 किमी लंबे रूट और इंदौर-बुरहानपुर के बीच 215 किमी के रूट पर पहले से काम जारी है। इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 450 किमी और लागत 7,972 करोड़ है। जिसकी डेडलाइन दिसंबर 2027 रखी गई है। मालवा-निमाड़ के सात जिलों को मिलाकर एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसका मकसद उद्योग, आईटी, पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नए निवेश लाना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है। योजना में इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर, खंडवा और खरगोन को एक आर्थिक नेटवर्क के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। हर जिले की अपनी आर्थिक ताकत के अनुसार उसे अलग-अलग सेक्टर का हब बनाया जाएगा, ताकि पूरे क्षेत्र में संतुलित विकास हो सके। योजना के अनुसार इंदौर को आईटी और इनोवेशन का केंद्र बनाया जाएगा।
उज्जैन धार्मिक पर्यटन और मेडिकल डिवाइस उद्योग के लिए विकसित होगा, जबकि देवास को औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स बेस के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। धार में टेक्सटाइल और सौर ऊर्जा परियोजनाएं, शाजापुर में फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर, खंडवा में ऊर्जा परियोजनाएं और खरगोन में कपास आधारित एग्रो-टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने की योजना है। इंदौर-पीथमपुर-देवास-धार औद्योगिक कॉरिडोर, उज्जैन-ओंकारेश्वर धार्मिक सर्किट और खरगोन-खंडवा एग्रो-टेक्सटाइल कॉरिडोर जैसे नए आर्थिक गलियारे इस क्षेत्र के विकास की रीढ़ बनेंगे। इसके साथ ही पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क, महाकाल लोक फेज-2, इंदौर-नागपुर एक्सप्रेसवे और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी योजना में शामिल हैं।

मप्र में बनेगा अनोखा हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे
मप्र में सडक़ कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राजधानी भोपाल को मंदसौर से जोडऩे के लिए नया एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा। यह हाई-स्पीड फोरलेन मार्ग एरियल डिस्टेंस के आधार पर तैयार किया जाएगा, यानी सडक़ को लगभग सीधी रेखा में इस तरह विकसित किया जाएगा कि यात्रा के दौरान मोड़, ट्रैफिक और भौगोलिक बाधाएं न्यूनतम रहें। प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे भोपाल से शुरू होकर सीहोर, शाजापुर, आगर और रतलाम जिले से गुजरते हुए मंदसौर के समीप ग्राम नयाखेड़ा तक पहुंचेगा। वर्तमान में भोपाल से मंदसौर तक पहुंचने के लिए करीब 350 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन नया मार्ग बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 250 किलोमीटर रह जाएगी। यानी यात्रियों को करीब 100 किलोमीटर कम सफर करना होगा। यह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे जमीन से लगभग आठ से दस फीट ऊंचाई पर बनाया जाएगा। सडक़ पर बेहद कम मोड़ होंगे और इसमें कहीं भी सीधे प्रवेश या कट की सुविधा नहीं रहेगी। किसी भी वाहन को बीच रास्ते से प्रवेश नहीं मिलेगा। गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही के लिए अंडरपास तैयार किए जाएंगे, जिससे हाईवे पर निर्बाध यातायात बना रहेगा और यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी। सरकार की योजना इस एक्सप्रेस-वे को केवल सडक़ परियोजना तक सीमित रखने की नहीं है। इसके दोनों ओर औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की भी तैयारी है, जिससे पश्चिमी मप्र में उद्योग, व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मप्र सडक़ विकास निगम ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रक्रिया शुरू कर दी है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष इस परियोजना का प्रस्तुतीकरण भी किया गया, जिस पर उन्होंने स्वीकृति देते हुए जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इस नए एक्सप्रेस-वे का लाभ केवल मप्र तक सीमित नहीं रहेगा। मंदसौर-नीमच क्षेत्र के साथ राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौडग़ढ़, बांसवाड़ा और उदयपुर के यात्रियों को भी तेज और सुविधाजनक कनेक्टिविटी मिल सकेगी। यात्रा समय और ईंधन की बचत के साथ यह परियोजना क्षेत्रीय आर्थिक विकास का नया आधार बन सकती है।

दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे
देश के हर इलाके में तेजी से बन रहे फोरलेन, एक्सप्रेस जैसे नेशनल हाइवे पर सफर का आनंद अलग ही होता है। अब कुछ दिनों बाद 8 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर सफर का आनंद लिया जा सकेगा। दरअसल दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का काम अंतिम चरण में है, उम्मीद की जा रही है कि साल के अंत तक इस एक्सप्रेस वे पर रफ्तार के साथ यातायात शुरू हो जाएगा। दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे एक तरह से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का हिस्सा है। 1 हजार किमी से ज्यादा के इस एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य 2019 में शुरू हुआ था, जो अब अंतिम चरण में है। हालांकि कुछ हिस्सों के पूरे हो जाने से यातायात शुरू हो चुका है। दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेस-वे करीब 1350 किमी लंबा प्रोजेक्ट है। जिसका उद्देश्य दिल्ली और वडोदरा के बीच यातायात सुगम बनाना है। ये दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे का प्रमुख हिस्सा है। देश के हरियाणा, राजस्थान, मप्र और गुजरात राज्यों में इस एक्सप्रेस-वे के तहत 900 किमी लंबा नेशनल हाइवे 148 एन बनाया जा रहा है। जो दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के नाम से जाना जाता है। इसकी खासियत ये है कि देश में बनाए गए दूसरे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे में से एक बेहतरीन 8 लेन मार्ग होगा। इसकी चौड़ाई करीब 100 मीटर की होगी। भविष्य में इस मार्ग को 12 लेन तक ले जाने की योजना है। दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की बात करें, तो हरियाणा के 3, राजस्थान के 7, मध्यप्र देश और गुजरात के तीन जिलों से गुजरेगा। इन सभी राज्यों के 16 जिलों में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण करके किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। गुरुग्राम के सोहना स्थित अलीपुर गांव से शुरू होने वाले इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण 95,000 करोड़ रुपए के बजट से किया जा रहा है। करीब 1350 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को 40 खंडों में विभाजित किया गया है। इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के चालू होते ही यात्रा में लगने वाला समय पहले की अपेक्षा आधा हो जाएगा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे हिस्से के रूप में दिल्ली-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे आंशिक रूप से चालू हो गया है। दिल्ली से कोटा (राजस्थान) और मप्र की सीमा तक के बड़े हिस्से पूरी तरह से जनता के लिए खुले हैं। दिल्ली से वडोदरा तक के बीच कोटा के पास सुरंग और गुजरात में हाई-टेंशन तारों का काम अंतिम चरण में है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह का कहना है कि एनएचएआई द्वारा बनाए जा रहे दिल्ली-वडोदरा मुंबई एक्सप्रेस-वे के दिसंबर 2026 तक शुरू होने की संभावना है। ये मार्ग दिल्ली और वडोदरा के बीच लगने वाले समय को आधा कर देगा। ये 8 लेन का एक्सेस-कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है। जिस पर वाहन 120 किमी/घंटा के रफ्तार से चल सकेंगे। इसे भविष्य में 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना है। फिलहाल दिल्ली से मुंबई के सफर में 24 घंटे लगते हैं, लेकिन इस एक्सप्रेस वे कारण ये समय आधा रह जाएगा।

स्वर्णिम चतुर्भुज योजना 2
केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय राष्ट्रीय स्वर्णिम चतुर्भुज योजना शुरू की गयी थी। जिसने सडक़ परिवहन के मामले में एक तरह से भारत को एक माला की तरह पिरो दिया है। एक विशाल रोड नेटवर्क के जरिए हमारे देश के चार कोनों को चारों महानगरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता से जोड़ा गया था। राष्ट्रीय स्वर्णिम चतुर्भज योजना के बाद अब केंद्र की सरकार राष्ट्रीय स्वर्णिम चतुर्भुज योजना-2 पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ सडक़ों के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक आधारित हाईस्पीड एक्सप्रेस-वे नेटवर्क तैयार करना है। भारत जैसे विशाल देश का भूगोल ऐसा है कि यहां पर माल परिवहन औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने में बड़ा रोड़ा है। देश के नेशनल हाइवे, इंडस्ट्रियल हब के आसपास सडक़ों का बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ना होने और लगातार जाम के कारण माल परिवहन में दुनिया में सबसे महंगा है। जिसके कारण औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ जाती है और बड़े पैमाने पर समय बर्बाद होता है। सडक़ों के जरिए माल परिवहन की गति बेहतर रोड नेटवर्क ना होने के कारण काफी धीमी हो जाती है। ऐसे में उत्पादों की कीमत बढ़ती है और औद्योगिक मुनाफा घट जाता है। ऐसे में गोल्डन क्वॉड्रिलैटरल 2।0 एक ऐसा एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर होगा, जो भीड़भाड़ वाले और जाम वाले शहरों के समांतर तैयार किया जाएगा। जो वाणिज्यिक माल ढुलाई की लागत कम करने के साथ गति प्रदान करेगा। इसके जरिए महानगरों और देश के औद्योगिक शहरों के बीच बेहतर संपर्क तैयार किया जोगा। माल ढुलाई में लगने वाले समय को 40 फीसदी तक कम किया जाएगा।
देश के मौजूदा नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस वे पर वाहनों की भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा। इसके जरिए देश के प्रमुख 11 इकानॉमिक कॉरिडोर को एकीकृत कर क्षेत्रीय विकास और लाजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत और गति प्रदान की जाएगी। ये परियोजना एक तरह से शुरू हो चुकी है। कई जगहों पर भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी में मामला अटका हुआ है। इस परियोजना की लागत 11 लाख करोड़ रुपए आंकी जा रही है। परियोजना के तहत आने वाले 5 से 7 साल के भीतर देश में 17 हजार किमी एक्सप्रेस वे का निर्माण किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वर्णिम चतुर्भुज- 2.0 की बात करें, तो इसका नेटवर्क विशालता लिए हुआ है। यह विश्वस्तरीय रोड नेटवर्क का दुनिया का एक अलग नमूना होगी। ये भारत के आर्थिक और औद्योगिक विकास की रीढ़ की हड्डी बनेगा और व्यापार के साथ यात्रा को निर्बाध गति प्रदान करेगा। जब परियोजना की विशालता की बात की जाती है, तो सरकार अगले पांच से सात साल के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय परियोजना के तहत 9 हजार किमी लंबी एक्सप्रेस वे योजनाओं को पहले ही मंजूर कर चुका है। फिलहाल 10 हजार किमी की योजना प्रस्तावित है, जिन्हें 2027 तक मूर्त रूप दे दिया जाएगा। इस परियोजना के तहत 17 हजार किमी के एक्सप्रेस वे आकार लेंगे। गोल्डन क्वॉड्रिलैटरल 2.0 का देश की अर्थ व्यवस्था पर काफी असर पड़ेगा। खासकर रियल एस्टेट, इकॉनामिक कॉरिडोर और सैटेलाइट शहर जैसे सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने मिलेगा। देश के 11 इकोनॉमिक कॉरिडोर राष्ट्रीय स्वर्णिय चतुर्भुज परियोजना -1.0 के आसपास निर्मित किए जा रहे हैं। गोल्डन क्वॉड्रिलैटरल 2.0 के तैयार होने के बाद बड़ी कंपनियां अपने फैक्ट्री और गोदाम महंगे, शहरी इलाकों से दूर ऐसे एक्सप्रेस वे के नजदीक करेंगे, जिनसे माल परिवहन में तेजी आएगी। इन एक्सप्रेस वे के नजदीक लॉजिस्टिक हब और इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होंगे। गोल्डन क्वॉड्रिलैटरल 2.0 के आकार लेना शुरू होते ही इसके आसपास और इसके किनारे रियल एस्टेट व्यावसाय में तेजी आएगी। इन एक्सप्रेस वे से लगी जमीनें महंगी होगी। अचल संपत्ति के दाम तेजी से बढ़ेंगे और यहां के जमीनों के दाम महानगरों की तरह हो जाएंगे। नए एक्सप्रेस वे से लगे हुए कस्बे और शहर सैटेलाइट शहर के तौर पर विकसित होंगे। यहां की आवासीय और व्यावसायिक संपत्ति के दामों में उछाल आएगा। देश भर में यात्रा के लिए बेहतर कनेक्टिविटी इन शहरों से विकसित होगी। यहां पर व्यावसायिक दफ्तर और आवासीय परिसरों के विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। एक्सप्रेस वे के इंटरजेज से लगी जमीनों पर औद्योगिक घराने और कंपनियां आकर्षित होगी। जिससे तेजी से मूल्य वृद्धि होगी। जिन जमीनों के दाम ना के बराबर थे, उनमें तेजी से उछाल आएगा।

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