लूट पर नकेल! निजी अस्पतालों के कमरों का तय होगा किराया

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने देश की निजी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बेहद अहम और क्रांतिकारी सिफारिश पेश की है। संसद में पेश की गई रिपोर्ट सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की सामर्थ्य और पहुंच के तहत यह सुझाव दिया गया है कि निजी अस्पतालों के सामान्य कमरों का किराया आसपास के थ्री-स्टार होटलों के औसत किराए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इस नियम को अभी बड़े महानगरों में सख्ती से लागू करने की वकालत की गई है। यह सीमा केवल अस्पताल के मूल कमरे के किराए यानी बेसिक रूम टैरिफ पर ही लागू होगी। इसके अलावा, अस्पताल रूम रेंट के अतिरिक्त अन्य जरूरी सेवाओं जैसे, डॉक्टरों की फीस, नर्सिंग चार्ज, दवाइयां, मेडिकल कंज्यूमेबल्स, भोजन और लॉन्ड्री का खर्च अलग से जोड़ सकेंगे। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में इलाज के दौरान रूम रेंट के नाम पर होने वाली बेहिसाब वसूली पर लगाम लगाने के लिए इसे पहले चरण में महानगरों में लागू करने को कहा गया है। नेशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक सरकारी और निजी अस्पतालों के खर्च में बहुत बड़ा अंतर है, जहां सरकारी अस्पताल में भर्ती होने का औसत खर्च 6,631 रुपए है।

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