सूखा घोषित किए बिना मदद के रास्ते तलाश रही सरकार

  • सूखे की मार झेल रहे 12 जिले, सूखा घोषित हुआ तो फसल मुआवजे से लेकर कर्ज और बीमा पर छूट का उठाना होगा बोझ

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश के 12 जिलों में बारिश की भारी कमी के बावजूद किसानों को सूखा राहत मिलने की राह आसान नहीं है। वजह सिर्फ सूखे के आकलन की तकनीकी गाइडलाइन नहीं, बल्कि राहत का बड़ा आर्थिक बोझ भी है। इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने पर सरकार को फसल नुकसान की भरपाई, किसानों के कर्ज पर राहत और बीमा प्रीमियम में छूट जैसे फैसले लेने पड़ सकते हैं। ऐसे में सरकार फिलहाल सूखा घोषित करने के बजाय दूसरे रास्तों से आर्थिक मदद पहुंचाने की तैयारी कर रही है। कम बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित आलीराजपुर है, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत कम पानी बरसा। बैतूल में 31, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में 27 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई। धार, झाबुआ, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, इंदौर, पांढुर्णा, शाजापुर और छिंदवाड़ा भी कम बारिश वाले जिलों में शामिल हैं। सरकार के सामने चुनौती यह है कि केवल बारिश की कमी के आधार पर किसी जिले को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए बुवाई के रकबे में गिरावट, फसलों की स्थिति और वास्तविक नुकसान का आकलन भी जरूरी है। यानी बारिश के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं, लेकिन राहत का फैसला कई दूसरे मानकों पर निर्भर है।
सरकार ने प्रभावित सभी 12 जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें कम बारिश के कारण पैदा हुई समस्याओं और उनसे निपटने के लिए जरूरी खर्च का ब्योरा तैयार करने को कहा गया है। इसके आधार पर जिलों के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। दूसरी ओर राज्य और केंद्र स्तर पर ऐसे विकल्प तलाशे जा रहे हैं, जिनसे औपचारिक रूप से सूखा घोषित किए बिना भी प्रभावित जिलों को अधिकतम आर्थिक सहायता दी जा सके। केंद्र सरकार भी कम बारिश वाले राज्यों और जिलों से आंकड़े जुटा रही है। इस संबंध में कई स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं। दिल्ली के सूत्रों के मुताबिक, केंद्र ऐसे क्षेत्रों के लिए अलग से आर्थिक इंतजाम कर सकता है।
फसल और बुवाई के आंकड़े बन सकते हैं राहत का आधार
खरीफ फसलों की कटाई और रबी की बुवाई का काम जारी है। सरकार इन दोनों के आंकड़ों पर भी नजर रख रही है। यदि प्रभावित जिलों में फसल का रकबा पिछले वर्षों की तुलना में घटता है या फसलों की स्थिति खराब मिलती है, तो इसे राहत के आकलन का आधार बनाया जा सकता है। इसके अलावा कम बारिश वाले जिलों में पेयजल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार अलग से अतिरिक्त राशि जारी कर सकती है।
सूखा घोषित हुआ तो कई मोर्चों पर बढ़ेगा खर्च
सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला सरकार के लिए बड़ा वित्तीय दायित्व लेकर आएगा। किसानों को फसल नुकसान पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता देनी होगी। इसके साथ ही कृषि ऋण पर ब्याज में छूट, कर्ज राहत और फसल बीमा प्रीमियम में रियायत जैसे उपाय भी करने पड़ सकते हैं। यही वजह है कि सरकार जल्दबाजी में सूखे का ऐलान करने के बजाय नुकसान का विस्तृत आकलन और आर्थिक विकल्पों पर काम कर रही है। हालांकि, प्रभावित जिलों में किसानों और आम लोगों के लिए राहत कितनी जल्दी और किस रूप में पहुंचेगी, यह आने वाले दिनों में तय होगा।
12 जिलों में बारिश की कमी
जिला सामान्य बारिश(मिमी) दर्ज बारिश(मिमी) कमी
– आलीराजपुर 871.8 426.0 51 प्रतिशत
– धार 818.8 492.9 40 प्रतिशत
– झाबुआ 884.2 576.4 35 प्रतिशत
– रतलाम 914.5 598.3 35 प्रतिशत
– नर्मदापुरम 1259.1 838.0 33 प्रतिशत
– हरदा 1078.8 728.9 32 प्रतिशत
– बैतूल 1038.1 718.3 31 प्रतिशत
– इंदौर 868.1 633.1 27 प्रतिशत
– उज्जैन 884.4 644.7 27 प्रतिशत
– पांढुर्णा 807.5 623.5 23 प्रतिशत
– शाजापुर 905.9 702.6 22 प्रतिशत
– छिंदवाड़ा 1032.9 815.0 लगभग 21 प्रतिशत

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