
- बोनस के लिए विभागों की मंजूरी जरूरी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र के विभिन्न सरकारी विभागों में काम करने वाले करीब 10 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों की यह दिवाली भी बिना बोनस के ही निकलेगी। सरकारी विभागों व कार्यालयों में काम करने वाले इन आउटसोर्स कर्मचारियों के बोनस भुगतान पर एक बड़ा पेंच फंस गया है। सबसे ज्यादा मैनपावर सप्लाई करने वाली प्रमुख एजेंसी सेडमैप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी जेब से कोई भुगतान नहीं करेगी। यदि संबंधित सरकारी विभाग लिखित में सहमति देंगे और अपने बजट से पैसा जारी करेंगे, तभी कर्मचारियों को बोनस मिल पाएगा।
सेडमैप का जवाब- विभाग पैसा देंगे, तभी मिलेगा बोनस: सेडमैप ने प्रदेश के समस्त विभागों व कार्यालय प्रमुखों को पत्र भेजकर महज 3 दिन की समय-सीमा दी थी, लेकिन 8 दिन बीत जाने के बाद भी माइनिंग डिपार्टमेंट को छोडक़र शेष किसी ने सहमति नहीं दी। सेडमैप की तरफ से पत्र में कहा गया है कि विभाग अपने यहां कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का बोनस गणना पत्रक (कैलकुलेशन शीट) और सहमति पत्र तुरंत भेजें। पत्र के अनुसार विभाग जब कर्मचारीवार सूची व स्वीकृति का सहमति पत्र देगा, उसी आधार पर सेडमैप बोनस का बिल (देयक) पेश करेगा। संबंधित विभाग जब सेडमैप के बिल का भुगतान कर देगा, उसके बाद ही कर्मचारियों के बैंक खातों में बोनस की राशि भेजी जाएगी।
लेटलतीफी: आउटसोर्स कर्मचारियों का बोनस सरकारी विभागों की लेटलतीफी से अटका है। सेमी गवर्नमेंट एम्प्लाइज फेडरेशन की शिकायत पर श्रम विभाग ने 29 सितंबर को श्रमायुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 23 अक्टूबर को उप श्रमायुक्त ने 10 लाख कर्मचारियों को बोनस अधिनियम का लाभ नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए।
