- राज्यसभा चुनाव विवाद में हाईकोर्ट का सख्त रुख
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कांग्रेस से राज्यसभा की प्रत्याशी रही मीनाक्षी नटराजन की चुनावी याचिका पर हाईकोर्ट ने निर्वाचित तीन सांसदों को अपना जवाब देने के लिए अंतिम मौका दिया है। हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट से कहा कि वे 27 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करें। ऐसा नहीं किया तो फिर उनका पक्ष रखने का अधिकार खत्म हो जाएगा। हाईकोर्ट की जस्टिस बीपी शर्मा की एकल पीठ ने मीनाक्षी नटराजन द्वारा महेश केवट के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि निर्धारित समय तक जवाब नहीं आने की स्थिति में उनका पक्ष रखने का अधिकार समाप्त किया जा सकता है।
कांग्रेस के खाते की थी सीट
राज्यसभा की जिस सीट पर महेश केवट निर्वाचित हुए थे, वह पूर्व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हुई थी। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर यह सीट कांग्रेस के खाते की मानी जा रही थी, लेकिन इस सीट पर भाजपा ने अपना प्रत्याशी भी मैदान में उतार दिया और निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया, जिससे भाजपा प्रत्याशी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
आयोग ने भी अलग से लगाया आवेदन
सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया है। मामले में निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया है और वे अपना जवाब दाखिल करेंगे। इस पर हाईकोर्ट ने आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नाम हटाने संबंधी आवेदन पर अलग से आदेश देने की बात कही है।
कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी का नामांकन हुआ था निरस्त
राज्यसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया था। आयोग ने यह निर्णय नटराजन द्वारा तेलंगाना में लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने पर लिया गया था। आयोग के इस फैसले के खिलाफ मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून 2026 को उनकी याचिका खारिज करते हुए चुनाव याचिका के माध्यम से उचित कानूनी चुनौती देने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद नटराजन ने जबलपुर में चुनाव याचिका दाखिल की है। जिसमें भाजपा उम्मीदवार महेश केवट के निर्वाचन को निरस्त करने की प्रक्रिया और राज्यसभा चुनाव से जुड़े फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले पर अदालत ने केवट के साथ निर्वाचित हुए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल से भी जवाब मांगा है, जिसके लिए कोर्ट ने अंतिम अवसर के तौर पर 27 नवम्बर की तारीख तय कर दी है। इस मामले में नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता और अधिवक्ता राजीव मिश्रा ने पैरवी की थी, जबकि निर्वाचन आयोग की तरफ से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ उपस्थित हुए।
