
- अवैध रेत कारोबार के लिए माफिया का नया फॉर्मूला
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। अवैध रेत कारोबार पर कार्रवाई की सख्ती के दावों के बीच रेत माफिया ने अपना तौर-तरीका बदल लिया है। अब नदियों से निकाली जा रही रेत सीधे वाहनों में भरकर नहीं ले जाई जा रही, बल्कि दिन के उजाले में जंगलों और सुनसान ठिकानों पर डंप की जा रही है। रात होते ही यही रेत डंपर और अन्य वाहनों के जरिए ठिकाने तक पहुंचाई जा रही है। इस नए तरीके से कारोबारियों ने निगरानी और कार्रवाई से बचने का रास्ता तलाश लिया है। शहडोल जिले के गोहपारू और सोहागपुर थाना क्षेत्रों में रेत के इस कारोबार को लेकर कई गंभीर चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप हैं कि थाना प्रभारियों के बदलाव के बाद कारोबारियों ने अपनी रणनीति बदली है। अग्रिम रकम लेकर कुछ वाहनों को परिवहन में कथित तौर पर बाधा नहीं आने देने की सहमति दिए जाने की बातें भी सामने आई हैं। हालांकि, इन आरोपों और कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सोहागपुर क्षेत्र में रेत कारोबार से जुड़े लोगों के बीच चर्चा है कि करीब 12 से 13 वाहनों के नंबरों की सूची तैयार कराई गई है। इन वाहनों को छह नवंबर तक परिवहन में परेशानी नहीं आने देने की कथित सहमति दिए जाने की बात कही जा रही है। गोहपारू क्षेत्र में भी इसी तरह की व्यवस्था संचालित होने के आरोप हैं। इस कथित व्यवस्था का सबसे अहम पहलू चुनिंदा वाहनों को छूट और दूसरे वाहनों पर कार्रवाई का है। यदि इन चर्चाओं में तथ्य है तो यह केवल अवैध उत्खनन का मामला नहीं, बल्कि कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, सूची में शामिल वाहनों, रकम के लेन-देन और किसी अधिकारी-कर्मचारी की भूमिका की पुष्टि होना बाकी है।
दिन में जंगलों में स्टॉक, रातभर परिवहन
रेत निकालने के बाद उसे तत्काल बाजार तक पहुंचाने के बजाय पहले आसपास के जंगलों और सुनसान स्थानों पर जमा किया जा रहा है। सोहागपुर के नरवार सहित गोहपारू क्षेत्र की नदियों से निकाली गई रेत को दिन में अलग-अलग स्थानों पर डंप करने और शाम ढलने के बाद वाहनों से परिवहन करने की बात सामने आई है। इस तरीके से कारोबारियों को दोहरा फायदा मिल रहा है। दिन में नदी और रास्तों पर वाहनों की आवाजाही कम रखी जाती है, जबकि रात में एक साथ कई वाहन रेत लेकर निकलते हैं। इससे निगरानी करना और अवैध परिवहन के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सोहागपुर थाने में पूर्व में पदस्थ रहे एक प्रधान आरक्षक की भूमिका को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की पुष्टि नहीं हुई है और किसी की संलिप्तता स्थापित करने के लिए जांच जरूरी है।
कार्रवाई में 350 घन मीटर रेत नष्ट, तीन वाहन जब्त
अवैध कारोबार की चर्चाओं के बीच प्रशासन और खनिज विभाग ने कार्रवाई भी की है। अधिकारी राहुल शांडिल्य ने रात में गोहपारू तहसील के ग्राम अतरिया में तीन स्थानों पर दबिश दी। यहां अवैध रूप से भंडारित करीब 350 घन मीटर रेत को जेसीबी से मिट्टी मिलाकर नष्ट कराया गया। वहीं ग्राम चुहिरी से अवैध रेत परिवहन में लगे एक वाहन को जब्त कर गोहपारू थाने में खड़ा कराया गया। इसके बाद सुबह एसडीएम काजोल सिंह ने गोहपारू क्षेत्र के बरेली में कार्रवाई करते हुए रेत का अवैध परिवहन कर रहे दो डग्गी और एक हाइवा को जब्त किया। इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण और परिवहन की गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुई हैं। अब चुनौती केवल वाहन पकडऩे की नहीं, बल्कि उन स्थानों और लोगों तक पहुंचने की है, जहां रेत जमा की जा रही है और जहां से रात में उसका परिवहन होता है।
बिलौआ में ओवरलोड गिट्टी डंपर पकड़ा
इधर, खनिज विभाग के उडऩदस्ते ने डबरा तहसील के बिलौआ क्षेत्र में भी औचक कार्रवाई की। टीम ने अवैध गिट्टी से भरा ओवरलोड डंपर जब्त किया। इसके साथ ही हाईकोर्ट के आदेश पर बंद कराई गई खदानों और क्षेत्र में संचालित वैध एवं स्वीकृत खदानों का निरीक्षण भी किया गया।
थाना प्रभारियों ने दिए कार्रवाई के भरोसे
गोहपारू थाना प्रभारी जेपी शर्मा ने कहा कि उनके थाना क्षेत्र से अवैध रेत की निकासी नहीं हो रही है। खनिज विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। वहीं सोहागपुर थाना प्रभारी संजय जायसवाल ने कहा कि क्षेत्र से निकलने वाले रेत के वाहनों पर कार्रवाई के लिए रात में गश्ती दल बनाया जाएगा। वह स्वयं भी गश्ती दल में शामिल रहेंगे। अब सवाल यह है कि जब दिन में जंगलों में रेत जमा हो रही है और रात में वाहन लगातार निकल रहे हैं, तो इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है? साथ ही, यदि चुनिंदा वाहनों को कथित रूप से परिवहन की छूट दिए जाने की चर्चा है तो इसकी जांच कौन करेगा? केवल वाहन जब्त करने से यह नेटवर्क नहीं टूटेगा। इसके लिए नदी से लेकर डंपिंग स्थल और परिवहन के अंतिम ठिकाने तक पूरे तंत्र की जांच जरूरी है।
