विपक्ष की रैली से…12,000 करोड़ के नुकसान का दावा

-राहुल गांधी को भेज दें कहीं दूर….

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। दिल्ली के रामलीला मैदान पर इंडिया ब्लॉक की वोट बचाओ, देश बचाओ रैली के बाद व्यापारियों में गुस्सा बढ़ गया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य ने कहा कि राहुल गांधी की अराजकता, भ्रम और डर की राजनीति के कारण व्यापारियों को 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कांग्रेस सांसद से सवाल पूछा कि इसकी भरपाई कौन करेगा? उन्होंने कहा, 1905 में बने देश के सबसे पुराने किराना संगठन ने पत्र लिखकर बताया है कि इन अड़चनों के कारण उनका 12 हजार करोड़ के नुकसान हुआ है। इसी तरह सूखे मेवे के व्यापारियों के संगठन ने एक हजार करोड़ के नुकसान का अंदाजा लगाया है। इस तरह की राजनीति करने के लिए राहुल गांधी को कहीं दूर भेज दिया जाए, ऐसे इलाकों में जहां भीड़-भाड़ न हो। इस तरह का आग्रह किया गया है।
रैली रोकने का कई बार किया आग्रह
बता दें कि रैली में आईएनडीआई द्वारा 10 लाख से अधिक प्रदर्शनकारियों के जुटने का दावा किया गया था। दीपावली के मद्देनजर त्यौहारी खरीदारी के प्रभावित होने की आशंका से व्यापारी संगठन ने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता व विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को दीपावली बाद तक स्थगित करने का आग्रह किया था। इसी तरह का आग्रह, कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सपा मुखिया अखिलेश यादव व तृणमूल की मुखिया ममता बनर्जी को भी लिखा था।
20 बाजारों पर पड़ा प्रभाव
स्थिति यह कि अधिकांश दुकानें तब तक बंद रही और उसके गलियारों में दरी बिछाकर प्रदर्शनकारी आराम करते तथा खाना खाते नजर आए। शाम को भी ज्यादा चहल पहल नजर नहीं आई और गलियारों से लेकर पार्किंग स्थल तक खाली रहे। इस बीच, कारोबारी संगठन चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दावा किया कि महारैली की वजह से रामलीला मैदान के आस-पास स्थित 20 बाजारों का करीब 11 हजार करोड़ की बिक्री प्रभावित हुई।
विपक्ष की रैली से दिल्ली के व्यापार को 11,000 करोड़ रुपए का नुकसान: सीटीआई
रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दावा किया है कि इसके कारण दिल्ली के कारोबार को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि रैली से पहले बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया था कि करीब 10 लाख लोग इसमें शामिल होंगे।  अनुमान था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को लाने के लिए लगभग 15,000 से 20,000 वाहन आएंगे। नतीजतन, पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। इसी वजह से राजधानी में कई दिनों से डर, अनिश्चितता और ट्रैफिक प्रतिबंधों का माहौल बना हुआ था, जिसका सीधा असर बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा।
पांच लाख खरीदारों में बमुश्किल एक लाख लोग पहुंचे
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने दावा किया कि रविवार को रैली की वजह से बाजारों में तनाव व डर का माहौल बरकरार रहा। ऐसे में रैली स्थल के आसपास स्थित बाजारों की 20 प्रतिशत ही दुकानें खुली रही। दिल्ली के आस-पास के शहरों से आने वाले खुदरा दुकानदार भी डर की वजह से दिल्ली आने से परहेज किया, जिसके चलते आम त्यौहारी खरीदारी में आने वाले पांच लाख खरीदारों में बमुश्किल एक लाख लोग पहुंचे।

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