भाजपा में अपने ही नेताओं के तेवर बने चुनौती

 भाजपा
  • संगठन के अनुशासन पर भारी पड़ रहा स्थानीय असंतोष
  • बिप्लब देव की सख्ती के बाद भी थम नहीं रही बयानबाजी और विरोध

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश भाजपा में संगठन के स्तर पर अनुशासन का संदेश लगातार दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर नेताओं के असंतोष और सार्वजनिक विरोध के मामले थमते नजर नहीं आ रहे हैं। प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव ने भोपाल में कोर ग्रुप की बैठक में साफ संकेत दिया था कि पार्टी में अनुशासनहीनता और बेलगाम बयानबाजी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगी। इसके बाद भी पिछले कुछ दिनों में पार्टी के भीतर ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनसे संगठन के सामने अपने ही नेताओं को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
सबसे ताजा मामला धार जिले का है, जहां धर्मपुरी विधायक कालूसिंह ठाकुर ने क्षेत्र में विकास कार्य और नागरिक सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर के निवास के बाहर 9 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा कर दी। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। हालांकि विधायक का कहना है कि उन्हें अभी नोटिस नहीं मिला है और नोटिस मिलने पर जवाब देंगे। साथ ही उन्होंने आंदोलन के अपने फैसले पर कायम रहने की बात कही है।
मंत्री के खिलाफ आंदोलन से संगठन की मुश्किल बढ़ी
विधायक का विरोध सीधे अपनी ही पार्टी की केंद्रीय मंत्री के खिलाफ होने से मामला और गंभीर हो गया है। स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं को लेकर उठाए गए मुद्दे अब संगठनात्मक अनुशासन के सवाल में बदल गए हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि स्थानीय असंतोष को कैसे शांत किया जाए और साथ ही यह संदेश भी कायम रखा जाए कि सार्वजनिक रूप से पार्टी के ही नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलना स्वीकार नहीं होगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब प्रदेश प्रभारी बिप्लब देव पार्टी नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी और अनुशासन के मामले में पहले ही चेतावनी दे चुके हैं।
ट्रैक्टर के लिए विधायक ने रात तक दिया धरना
भाजपा के भीतर असंतोष का दूसरा उदाहरण चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार का है। एक आदिवासी किसान का वन विभाग द्वारा जब्त ट्रैक्टर छुड़ाने की मांग को लेकर विधायक सोमवार को मझगवां स्थित वन विभाग के रेंज कार्यालय में धरने पर बैठ गए। उनका विरोध करीब 10 घंटे चला और रात 12 बजे तक जारी रहा। वन विभाग के अनुसार, वन भूमि पर अवैध जुताई की सूचना के बाद बिना वैध दस्तावेज वाले ट्रैक्टर को जब्त किया गया था। विभाग ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ट्रैक्टर छोडऩे में असमर्थता जताई। इसके बाद विधायक किसान के समर्थन में धरने पर बैठ गए। कलेक्टर और एसपी भी मौके पर पहुंचे और विधायक को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। बाद में मुख्यमंत्री निवास से बातचीत और मामले की निष्पक्ष जांच तथा नियमानुसार कार्रवाई के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ।
सांसद की बयानबाजी ने विपक्ष को दिया मुद्दा
इसी बीच भाजपा सांसद गजेन्द्र पटेल के बयान को लेकर भी सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पांच बच्चे पैदा करने संबंधी बयान के बाद अब उनका एक और बयान चर्चा में है, जिसमें उन्होंने युवाओं को नशे और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने की सलाह देते हुए 3 डी यानी दारू, डीजे और दहेज से दूरी बनाने का आह्वान किया। सांसद ने डीजे पर नाचने वाले युवाओं को लेकर टिप्पणी की, जिसे कांग्रेस ने मुद्दा बनाते हुए भाजपा और सांसद पर निशाना साधा। भाजपा सांसद का तर्क युवाओं को नशे से दूर रखने और अनुशासित जीवनशैली अपनाने का था, लेकिन बयान का राजनीतिक अर्थ निकाला गया और विपक्ष ने इसे युवाओं का अपमान बताते हुए हमला शुरू कर दिया।
सवाल सिर्फ बयानबाजी का नहीं, संगठन की पकड़ का भी
भाजपा में हाल के घटनाक्रमों को अलग-अलग स्थानीय मामलों के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इनके बीच एक समानता है—पार्टी के नेता अपनी बात संगठन के भीतर रखने के बजाय सार्वजनिक रूप से मुखर हो रहे हैं। कहीं विधायक अपनी ही पार्टी की मंत्री के खिलाफ आंदोलन की घोषणा कर रहा है, तो कहीं विधायक प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में घंटों धरने पर बैठ रहा है। दूसरी ओर सांसद के बयान विपक्ष को लगातार हमले का अवसर दे रहे हैं। ऐसे में बिप्लब देव की सख्त चेतावनी के बाद संगठन के सामने असली परीक्षा अब कार्रवाई की नहीं, बल्कि अनुशासन और स्थानीय असंतोष के बीच संतुलन बनाने की है। कालूसिंह ठाकुर को नोटिस देकर पार्टी ने पहला संदेश जरूर दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ऐसे मामलों पर कार्रवाई कितनी समान और प्रभावी रहती है। यानी मध्यप्रदेश भाजपा में फिलहाल चुनौती विपक्ष से ज्यादा कई जगह अपने ही नेताओं के तेवरों को संभालने की दिखाई दे रही है।

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