
- सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भोपाल को मिली प्राथमिकता
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश के दो बड़े शहरों के मास्टर प्लान की प्रक्रिया इस समय अलग-अलग गति से आगे बढ़ रही है। इंदौर का नया मास्टर प्लान ड्राफ्ट तैयार होकर नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय को भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। दूसरी ओर, भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई के बीच सरकार ने राजधानी के मास्टर प्लान को प्राथमिकता देते हुए उसका ड्राफ्ट जारी कर दिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इंदौर का मास्टर प्लान भोपाल के ड्राफ्ट से पहले ही तैयार हो गया था। कार्यालय संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, इंदौर से इसे संचालनालय भेजा गया था और वहां परीक्षण की प्रक्रिया भी चल रही थी। पहले इंदौर का ड्राफ्ट जारी करने की तैयारी थी, लेकिन भोपाल में बने हालात के बाद प्राथमिकता बदल गई।
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होने के बाद भूमि उपयोग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बढ़ गई। इसी दौरान भोपाल के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज की गई। अधिकारियों के मुताबिक ड्राफ्ट तैयार होने के बाद उसे संचालनालय भेजा गया और परीक्षण के बाद राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया। अब इस पर दावे-आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। यानी इंदौर का ड्राफ्ट पहले तैयार होने के बावजूद भोपाल में तत्काल बनी प्रशासनिक और न्यायिक स्थिति के कारण राजधानी का मास्टर प्लान पहले सार्वजनिक हो गया।
इंदौर का तीसरा मास्टर प्लान, 2041 तक का खाका
इंदौर का नया मास्टर प्लान शहर के तीसरे मास्टर प्लान के रूप में तैयार किया गया है। मौजूदा मास्टर प्लान की अवधि वर्ष 2021 में समाप्त हो चुकी है। नए प्लान में वर्ष 2041 तक की अनुमानित आबादी और शहर के विस्तार को आधार बनाया गया है। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2041 में इंदौर की अनुमानित आबादी करीब 53 लाख रखी गई है। इसके आधार पर नियोजन क्षेत्र को मौजूदा करीब 505 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर लगभग 880 वर्ग किलोमीटर किए जाने का प्रस्ताव है। नियोजन क्षेत्र में शामिल गांवों की संख्या भी करीब 90 से बढ़कर 169 किए जाने की योजना है। यानी नया प्लान केवल मौजूदा शहरी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी शहर के भविष्य के विस्तार से जोड़ेगा।
वर्टिकल डेवलपमेंट पर रहेगा जोर
इंदौर के नए मास्टर प्लान में शहर के विस्तार को केवल बाहर की ओर बढ़ाने के बजाय वर्टिकल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया है। बढ़ती आबादी और सीमित भूमि के बीच ऊंची इमारतों और अधिक सघन विकास को नियोजित तरीके से बढ़ाने का खाका तैयार किया गया है। इसके साथ ही भूमि उपयोग, आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक गतिविधियां, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।
भोपाल का प्लान लागू होने में लगेंगे 4-5 महीने
भोपाल के मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर दावे-आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 25 अक्टूबर तक समय दिया गया है। इसके बाद करीब 90 दिन तक आपत्तियों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया चलेगी। सुझाव और आपत्तियों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद राजपत्र में अंतिम प्रकाशन होगा और इसके बाद मास्टर प्लान लागू किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच महीने लगने का अनुमान है।
इंदौर को अभी करना होगा इंतजार
इंदौर का ड्राफ्ट तैयार होने और संचालनालय स्तर पर पहुंचने के बावजूद उसे तत्काल जारी करने की स्थिति नहीं बनी है। सरकार की मौजूदा प्राथमिकता भोपाल मास्टर प्लान को अंतिम रूप देकर लागू करने की है। भोपाल में मास्टर प्लान लागू होने के बाद भूमि उपयोग और आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामलों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। इसके बाद इंदौर के तैयार ड्राफ्ट पर आगे की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इस तरह एक ही विभाग के सामने दो बड़े शहरों के मास्टर प्लान हैं-इंदौर का ड्राफ्ट पहले तैयार होकर फाइल में है, जबकि भोपाल का बाद में आगे बढ़कर सार्वजनिक हो चुका है। अब इंदौर के 2041 तक के विकास खाके को सार्वजनिक करने की अगली तारीख सरकार और नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
