
- पुराने मास्टर प्लान में आईं थी 1500 आपत्तियां
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। चंदनपुरा-मेंडोरा के जिस इलाके की 357.780 हेक्टेयर जमीन को सरकार ने संरक्षित वन घोषित किया है, उसी क्षेत्र से जुड़ी सडक़ को नए मास्टर प्लान में 60 मीटर चौड़ा करने का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी सडक़ और आसपास के ग्रीन बेल्ट को लेकर पूर्व में मास्टर प्लान की तैयारी के दौरान करीब 1500 लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। पर्यावरणविद् रशीद नूर खान ने भी इस मुद्दे को लेकर न्यायिक मंच पर मामला उठाया था। अब नए मास्टर प्लान में सडक़ की चौड़ाई 60 मीटर किए जाने से पुराने विवाद ने फिर तूल पकड़ लिया है।
2021 में 357.780 हेक्टेयर जमीन संरक्षित वन
वन विभाग के दस्तावेजों के अनुसार चंदनपुरा और मेंडोरा क्षेत्र की कुल 357.780 हेक्टेयर जमीन को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 29 के तहत संरक्षित वन के दायरे में लाया गया था। इसमें चंदनपुरा की 238.141 हेक्टेयर और मेंडोरा की 119.639 हेक्टेयर जमीन शामिल है। जुलाई 2021 में इनसे संबंधित अधिसूचनाएं राजपत्र में प्रकाशित हुई थीं। अधिसूचना में चंदनपुरा के कई खसरा नंबर शामिल हैं। दस्तावेज के मुताबिक चंदनपुरा वनखंड में खसरा नंबर 73, 74, 75/2, 77/2, 78/2, 79/2, 80, 82/1, 81/2, 82/2, 83/1,84 और 92 समेत अन्य जमीन शामिल है। चंदनपुरा के हिस्से का कुल रकबा 238.141 हेक्टेयर बताया गया है।
उन्नत तकनीक के लिए वन विभाग को सौंपी गई थी जमीन
सरकारी दस्तावेजों में उल्लेख है कि कलेक्टर भोपाल के 10 फरवरी 2003 के आदेश के माध्यम से कुल 357.780 हेक्टेयर राजस्व वन भूमि यानी छोटे-बड़े झाड़ के जंगल की जमीन वन विभाग को हाईटेक प्लांटेशन के लिए हस्तांतरित की गई थी। बाद में 2021 में इसे संरक्षित वन के रूप में अधिसूचित किया गया। वन मंडल भोपाल ने इन अधिसूचनाओं में शामिल रकबे को पुनरीक्षित कार्य आयोजना में समायोजित करने के लिए भी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा था।
आपत्तियों के बाद फिर वही सडक़ अब चर्चा में
चंदनपुरा, कार्यवाडे क्षेत्र और आसपास के ग्रीन बेल्ट में सडक़ के प्रावधान को लेकर पिछले मास्टर प्लान के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तियां, आई थीं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने सडक़ विस्तार से वन क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट पर पडऩे वाले असर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। करीब 1500 आपत्तियों के बाद पर्यावरणविद् रशीद नूर खान में भी इस मामले को अदालत में उठाया। चेट्नपुरा क्षेत्र से संबंधित बाद की न्यायिक कार्यवाही में भी वन क्षेत्र, वन्यजीवों की आवाजाही और विकास गतिविधियों के प्रभाव का मुद्दा सामने आया। एनजीठी के 2025 के आदेश में चंदनपुरा क्षेत्र को महत्वपूर्ण वन क्षेत्र बताया गया है और वन विभाग के अनुसार यहां वन्यजीवों, जिसमें बाघ की आवाजाही भी शामिल है, की निगरानी की जाती है। साथ ही रिकॉर्ड में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह क्षेत्र अधिसूचित टाइगर रिजर्व नहीं है।
केंद्रीय स्तर से भी सडक़ बढ़ाने पर आपत्ति का दावा
इस मामले में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई थी। इसमें सडक़ को आगे नहीं बढ़ाने और वन्यजीवों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई थी। अब नए मास्टर प्लान में इसी सडक़ को 60 मीटर चौड़ा करने का प्रावधान होने से सवाल उठ रहा है कि पुराने विरोध और पर्यावरणीय चिंताओं को नए प्रावधान तैयार करते समय किस तरह देखा गया।
