सीपीसीटी की बाध्यता हटाने जा रही सरकार

  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का मामला…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
बाबू बनने का इंतजार कर रहे प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में कंप्यूटर दक्षता प्रमाणिक परीक्षा (सीपीसीटी) की बाध्यता की बाधा जल्द ही हटने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बाध्यता की बाधा को हटाने की तैयारी कर ली है। इसका फार्मेट भी तैयार कर लिया गया है। मगर लगातार छुट्टियां इसमें बाधा बन गई हैं। अब छुट्टियों से लौटते ही प्रदेश भर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बिना सीपीसीटी पदोन्नति की सौगात मिल सकती है। जानकारी के अनुसार गुरुवार को सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी तैयारी लगभग पूर्ण कर ली थी। फाइल भी तेजी से ऊपर-नीचे होती रही। सामान्य प्रशासन के मंत्री और आला अधिकारी भी इस संबंध में नजर रखे हुए थे। जीएडी ने आदेश का फार्मेट भी तैयार कर मंत्री को भेज दिया था। मगर शाम होते-होते फाइल थम गई। कुछ जरूरी अनुमति मिलना बाकी हैं। बताया जाता है कि अब सोमवार को इस फाइल पर हस्ताक्षर होने के साथ ही आदेश जारी कर दिया जाएगा। इसका लाभ मंत्रालय सहित प्रदेश के सभी विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिलना है। पहले जीएडी ने ही चतुर्थ श्रेणी से तृतीय वर्ग में पदोन्नति के लिए सीपीसीटी की बाध्यता रख दी थी। लिपिक वर्ग के लिए कंप्यूटर ज्ञान अनिवार्य माना गया था। इस अनिवार्यता ने बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारियों की पदोन्नति में बाधा खड़ी कर दी थी, जो अधिकांश सेवाकाल गुजार चुके हैं। इन कर्मचारियों की समस्या को देखते हुए कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री से चर्चा की थी। इस पर मुख्यमंत्री यादव ने भी उदारता दिखाते हुए सीपीसीटी से छूट देने का ऐलान कर दिया था। इससे प्रदेश भर में 5 हजार से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिल सकता है।
अनुकंपा नियुक्ति वालों को निराशा
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अलावा अनुकंपा नियुक्ति से लिपिक श्रेणी का पद पाने वाले वाले भी सीपीसीटी से छूट की उम्मीद लगाए बैठे थे। मगर इन्हें निराशा ही हाथ लग सकती है। बताया जाता है कि जीएडी केवल चतुर्थ श्रेणी से पदोन्नत होकर लिपिक बनने वालों को ही सीपीसीटी से छूट का प्रावधान कर रहा है। अनुकंपा नियुक्ति पाकर सीधे लिपिक बने कर्मचारियों को कंप्यूटर परीक्षा उत्तीर्ण करना ही होगी। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने इसका विरोध करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीपीसीटी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की तो मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों को रास्ता निकालने के निर्देश दिए। इस पर अब यह प्रविधान किया जा रहा है कि जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आयु 45 वर्ष से अधिक है, उन्हें पदोन्नति के लिए सीपीसीटी से छूट दी जाए। वहीं, इसे उत्तीर्ण करने की अवधि दो से बढ़ाकर पांच वर्ष करने के साथ केवल इस आधार पर किसी कर्मचारी को पदावनत नहीं किया जाएगा कि उसने सीपीसीटी उत्तीर्ण नहीं की है।

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