ओवैसी बनाम रामेश्वर शर्मा: 230 सीटों की चुनौती से गरमाई मप्र की सियासत

ओवैसी बनाम रामेश्वर शर्मा
  • काजी कैंप के ‘मिसाइल’ बयान पर भिड़े दोनों नेता…
  • ओवैसी की चुनौती के जवाब में शर्मा बोले-हिम्मत है तो पूरे प्रदेश में चुनाव लडक़र दिखाओ…
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश की सियासत में असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। काजी कैंप को लेकर शर्मा की टिप्पणी पर ओवैसी ने उन्हें चुनौती दी, तो जवाब में शर्मा ने  एमआईएमआईएम प्रमुख को मप्र की सभी 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लडक़र अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने की चुनौती दे दी। इसके साथ ही विवाद महज बयानबाजी तक सीमित न रहकर चुनावी प्रभाव और जनसमर्थन की बहस में बदलता नजर आ रहा है।
    विवाद की शुरुआत भोपाल के करोंद इलाके में आयोजित एक कार्यक्रम से हुई। जिसमें शर्मा ने काजी कैंप की ओर मिसाइल छोडऩे संबंधी टिप्पणी की थी। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संदर्भ भोपाल के काजी कैंप से नहीं, बल्कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित काजी कैंप से था। ओवैसी ने इसी टिप्पणी को लेकर शर्मा को चुनौती दी। इसके जवाब में शर्मा ने ओवैसी और कांग्रेस पर हिंदू-मुसलमान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। शर्मा का कहना है कि राजनीतिक ताकत का वास्तविक फैसला जनता चुनाव के जरिए करती है।
    भाजपा के मुखर हिंदुत्ववादी नेताओं में पहचान
    रामेश्वर शर्मा मध्य प्रदेश भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं, जो हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर मुखर रुख के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी भाषण शैली और सार्वजनिक टिप्पणियां अक्सर राजनीतिक बहस का हिस्सा बनती रही हैं।
    हुजूर से तीन चुनाव जीते
    भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट शर्मा का प्रमुख राजनीतिक आधार रही है। वे 2013, 2018 और 2023 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए। लगातार चुनावी जीत और लंबे संगठनात्मक अनुभव ने उन्हें भोपाल भाजपा के प्रमुख जमीनी नेताओं में स्थापित किया है।
    राम मंदिर आंदोलन से बजरंग दल तक
    रामेश्वर शर्मा की राजनीतिक पृष्ठभूमि हिंदुत्व से जुड़े संगठनों और आंदोलनों से रही है। उन्होंने बजरंग दल में भोपाल के संयोजक की जिम्मेदारी भी संभाली। अयोध्या राम मंदिर आंदोलन के दौर में उनकी सक्रियता ने उनकी हिंदुत्ववादी राजनीतिक पहचान को मजबूत किया।भाजपा की सक्रिय राजनीति में आने के बाद उन्होंने संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं और धीरे-धीरे भोपाल की चुनावी राजनीति में अपनी जगह मजबूत की।
    230 सीटों की चुनौती से बदला राजनीतिक फोकस
    ओवैसी के साथ जारी जुबानी जंग में शर्मा की 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लडऩे की चुनौती ने विवाद को व्यापक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। मप्र में एआईएमआईएम के राजनीतिक विस्तार की संभावनाओं के बीच शर्मा ने सीधे चुनावी मैदान को राजनीतिक ताकत मापने की कसौटी के तौर पर सामने रखा है। अब नजर इस बात पर है कि ओवैसी और शर्मा के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग आगे किस रूप में बढ़ती है और क्या 230 सीटों की चुनौती मप्र की चुनावी राजनीति में किसी बड़े राजनीतिक विमर्श का आधार बनती है।

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