डायल-100 के पुराने सर्वर पर दौड़ रहा पुलिस का पोलारिस

  • पुराने सर्वर को रीयूज कर पुलिस ने बचाए 5 करोड़

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।  डायल-100 को 112 में बदलने के बाद अनुपयोगी हुए पुराने सर्वर का मध्यप्रदेश पुलिस ने ऐसा इस्तेमाल किया कि इसी पर अब पुलिस का क्लाउड बेस्ड एप्लीकेशन पोलारिस दौड़ रहा है। इस डिजिटल पहल से पुलिसकर्मियों को फाइलों और कागजी दस्तावेजों के साथ मीटिंग में पहुंचने की जरूरत कम हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, नए सर्वर की व्यवस्था की जाती तो करीब 5 करोड़ रुपए का खर्च आता, लेकिन पुराने संसाधन को दोबारा उपयोग में लेकर यह खर्च बचाया गया।
डायल-100 सेवा को 112 में परिवर्तित किए जाने के बाद उसके पुराने सर्वर का उपयोग नहीं हो रहा था। इसी सर्वर को एमपी पुलिस की दूरसंचार शाखा ने क्लाउड बेस्ड एप्लीकेशन पोलारिस के लिए इस्तेमाल किया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह संसाधनों के पुन: उपयोग का उदाहरण है, जिसमें पहले से उपलब्ध इंफ्रास्ट्रक्चर को नई डिजिटल जरूरत के लिए इस्तेमाल किया गया। पोलारिस में दस्तावेज और डाटा स्टोर करने के साथ उन्हें अधिकृत यूजर्स के बीच शेयर करने की सुविधा है। पुलिसकर्मी यूजर आईडी और पासवर्ड के जरिए इसमें लॉगिन कर सकते हैं।
एसपी ऑफिस से अब थानों तक विस्तार
पोलारिस का इस्तेमाल पहले पुलिस के कार्यालयीन कामकाज में किया जा रहा था। प्रदेश के सभी 55 एसपी कार्यालय इससे जोड़े जा चुके हैं। इसके अलावा 200 से अधिक एसडीओपी और सीएसपी कार्यालयों में भी इसका उपयोग हो रहा है। अब दूसरे चरण में प्रदेश के थानों को भी सिस्टम से जोडऩे की प्रक्रिया चल रही है। इसका उद्देश्य फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों तक डिजिटल सिस्टम की पहुंच बढ़ाना है।
क्राइम मीटिंग में फाइलों का बोझ होगा कम
जिले की क्राइम मीटिंग हो या पुलिस मुख्यालय की समीक्षा बैठक, पुलिसकर्मियों को अब जरूरी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी लेकर पहुंचने की अनिवार्यता कम होगी। पोलारिस के जरिए मीटिंग में डिजिटल दस्तावेज और कार्ययोजनाएं प्रस्तुत की जा सकती हैं। एप्लीकेशन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा भी है। पुलिस अधिकारी इसके जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में शामिल होने के साथ बैठक आयोजित कर सकते हैं। विभागीय कार्ययोजनाओं और जरूरी डाटा को भी डिजिटल माध्यम से देखा जा सकता है।
फील्ड पुलिस को दी जा रही ट्रेनिंग
कार्यालयों में पोलारिस का उपयोग पहले से किया जा रहा है, लेकिन अब फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों को भी इसका प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खासकर तकनीकी रूप से कम दक्ष कर्मचारियों को एप्लीकेशन के इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही है। इसका इस्तेमाल मोबाइल के जरिए भी किया जा सकता है।
मल्टी-लेयर सुरक्षा का दावा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पोलारिस में मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है। इसका उद्देश्य पुलिस के संवेदनशील विभागीय डाटा को सुरक्षित रखना है। क्लाउड बेस्ड सिस्टम होने के कारण अधिकृत यूजर इंटरनेट के जरिए अलग-अलग स्थानों से डाटा और एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अगले साल ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए आवेदन
पुलिस इसे डिजिटल रि-इंजीनियरिंग और संसाधनों के पुन: उपयोग से जुड़ा नवाचार मान रही है। विभाग की ओर से आगामी वर्ष ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए भी आवेदन करने की तैयारी है। एसपी पुलिस रेडियो मुख्यालय अंकित शुक्ला के मुताबिक, पोलारिस क्लाउड बेस्ड सर्विस है, जिसका मुख्य उद्देश्य पुलिस के डेटा को सुरक्षित रखना है। पहले एसपी कार्यालय सहित अन्य कार्यालय इसका उपयोग कर रहे थे, अब फील्ड के पुलिसकर्मियों को भी इसके इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित और प्रेरित किया जा रहा है। यह सिस्टम डायल-100 के पुराने सर्वर पर रन कर रहा है।

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