10 रुपए की राशि पशु आहार उपलब्ध कराने पर होगा खर्च

पशु आहार
  • गौशालाओं को नकद अनुदान घटेगा,  5 लाख गायों के लिए बदलेगी व्यवस्था

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश की अनुदान प्राप्त गौशालाओं में अब गायों के चारे-दाने की व्यवस्था का तरीका बदलने जा रहा है। सरकार प्रत्येक गाय के लिए मिलने वाले दैनिक अनुदान में से 10 रुपए की राशि सीधे गौशालाओं को देने के बजाय पशु आहार उपलब्ध कराने पर खर्च करेगी। इसके चलते गौशालाओं को मिलने वाला नकद अनुदान 40 से घटकर 30 रुपए प्रति गाय प्रतिदिन हो जाएगा।
नई व्यवस्था में करीब 5 लाख निराश्रित गायों के लिए दाना सरकार उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सालाना लगभग 180 करोड़ रुपए की राशि मप्र स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन यानी दुग्ध महासंघ को दी जाएगी। महासंघ अपने पशु आहार प्लांट के जरिए गौशालाओं तक निर्धारित मात्रा में कैटल फीड पहुंचाएगा। संभावना है कि नई व्यवस्था अगले माह से लागू हो सकती है।
720 करोड़ के अनुदान का बदलेगा स्वरूप
वर्तमान में प्रदेश की अनुदान प्राप्त गौशालाओं को प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपए दिए जाते हैं। इसमें चारा-भूसा, रखरखाव और दाने का खर्च शामिल है। सरकार के इस बदलाव के बाद करीब 720 करोड़ रुपए के सालाना प्रावधान में से लगभग 540 करोड़ रुपए नकद अनुदान के रूप में गौशालाओं को मिलेंगे, जबकि करीब 180 करोड़ रुपए पशु आहार की सप्लाई पर खर्च होंगे। इस व्यवस्था का आधार प्रदेश की करीब 2964 अनुदान प्राप्त गौशालाओं में रखी गई लगभग 5 लाख गायों की संख्या होगी। हर महीने गौशालाओं में मौजूद गौवंश के हिसाब से पशु आहार की मात्रा तय कर सप्लाई की जाएगी।
दाने की कमी की शिकायतों के बाद फैसला
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सरकार को कुछ गौशालाओं में गायों को पर्याप्त दाना नहीं मिलने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद दाने के लिए निर्धारित राशि सीधे गौशाला संचालकों को देने के बजाय पशु आहार के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे गायों को संतुलित आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था अधिक सुनिश्चित हो सकेगी। मप्र दुग्ध महासंघ के प्रदेश में चार पशु आहार प्लांट संचालित हैं। इन्हीं प्लांट से तैयार होने वाला आहार गौशालाओं को उपलब्ध कराया जाएगा। इससे महासंघ के पशु आहार प्लांट के उत्पादन और मांग में भी वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।
गौशालाओं के लिए बदलेगा खर्च का गणित
नई व्यवस्था में गौशाला संचालकों को दाने की खरीद के लिए अलग से व्यवस्था नहीं करनी होगी। सरकार निर्धारित मात्रा में पशु आहार सीधे उपलब्ध कराएगी। दूसरी ओर, गौशालाओं को मिलने वाली नकद राशि 10 रुपए प्रति गाय प्रतिदिन कम हो जाएगी। यानी संचालकों के पास चारा-भूसा और रखरखाव सहित अन्य खर्चों के लिए पहले की तुलना में कम नकद राशि उपलब्ध होगी।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना से भी जुड़ा फैसला
यह बदलाव प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की व्यापक योजना से भी जुड़ा है। 13 अप्रैल 2025 को भोपाल में एनडीडीबी और मप्र स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के बीच एमओयू हुआ था। इसके बाद प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार करने की योजना पर काम चल रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 7331 गांव सहकारी दुग्ध समितियों के दायरे में हैं। अगले पांच साल में इसे बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक ले जाने का लक्ष्य बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार गौशालाओं की अनुदान व्यवस्था में बदलाव भी इसी व्यापक पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन ढांचे से जुड़ा है।
प्रदेश में 10.37 लाख निराश्रित गौवंश
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 10.37 लाख निराश्रित गौवंश हैं। इनमें से लगभग 5 लाख गौवंश वर्तमान में अनुदान प्राप्त गौशालाओं में हैं। शेष गौवंश के लिए 100 क्षमता वाली करीब 5144 अतिरिक्त गौशालाओं की जरूरत बताई गई है। प्रदेश में कुल गौवंश की संख्या करीब 1.87 करोड़ है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत अवर्णित नस्ल का गौवंश बताया गया है। पशुपालन संचालनालय के संचालक डॉ. पीएस पटेल के अनुसार, गौशालाओं में गायों की सेहत सुधारने के उद्देश्य से अनुदान वितरण व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है।

Related Articles