
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था अब ऑनलाइन होने जा रही है। सरकार ने आउटसोर्सिंग से जुड़ी जानकारी को रोम्स (आरओएएमएस) पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसमें आउटसोर्स एजेंसी के पंजीयन और सत्यापन से लेकर कर्मचारी की आधार ई-केवाईसी, ऑनबोर्डिंग, मासिक हाजिरी और एजेंसी के इनवॉइस तक का रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने इस व्यवस्था में एक बड़ी कमी बताते हुए कर्मचारियों के लिए अलग एम्प्लॉई लॉगिन देने की मांग की है।
संगठनों का सवाल है कि जब कर्मचारी की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी तो कर्मचारी खुद अपना रिकॉर्ड क्यों नहीं देख सकेगा? उनका कहना है कि कर्मचारी को यह पता चलना चाहिए कि पोर्टल पर उसकी कितनी हाजिरी दर्ज है, उसके नाम पर कितना वेतन दिखाया गया है और वेतन से कितनी राशि काटी गई है। खासकर पीएफ की कटौती को लेकर संगठनों का कहना है कि कर्मचारी को इसकी जानकारी ऑनलाइन देखने की सुविधा मिलनी चाहिए। वित्त विभाग ने जारी आदेश में सभी विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों को रोम्स पर लंबित प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। 31 अक्टूबर तक सभी लंबित अनुबंध, कार्यादेश और संबंधित प्रक्रियाएं पोर्टल पर पूरी करनी होंगी। वहीं अक्टूबर 2026 से आउटसोर्स सेवाओं के भुगतान के लिए रोम्स से जनरेट इनवॉइस अनिवार्य किया गया है। बिना रोम्स इनवॉइस के कोषालय में देयक पारित नहीं होगा।
1 अप्रैल से नए अनुबंध रोम्स पर दर्ज करना जरूरी
सरकार ने 1 अप्रैल 2026 के बाद किए गए नए आउटसोर्सिंग अनुबंध और कार्यादेश को रोम्स पर दर्ज करना अनिवार्य किया है। पहले से चल रहे अनुबंधों की जानकारी भी पोर्टल पर दर्ज की जानी है। इसके जरिए सरकार आउटसोर्सिंग से जुड़ी प्रक्रिया को एक डिजिटल सिस्टम में लाने की कोशिश कर रही है। अस्थाई, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि सरकार ने आउटसोर्सिंग की व्यवस्था को डिजिटल करने की शुरुआत की है, लेकिन इसमें कर्मचारी को सीधे जोडऩे वाली व्यवस्था नहीं है। कर्मचारी के लिए एम्प्लॉई लॉगिन दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी को अपने ही रिकॉर्ड के लिए एजेंसी या अधिकारी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से लॉगिन करके यह देखने की सुविधा मिलनी चाहिए कि उसकी कितनी हाजिरी दर्ज है, कितना वेतन बना है और वेतन से कौन-कौन सी कटौती की गई है।
पीएफ की जानकारी भी कर्मचारी को दिखे
संगठन की प्रमुख आपत्ति वेतन और पीएफ को लेकर है। शर्मा का कहना है कि यदि कर्मचारी को अपना लॉगिन नहीं दिया जाता तो वह यह भी ऑनलाइन नहीं देख पाएगा कि उसके वेतन से पीएफ के नाम पर कितनी राशि काटी गई और उसका रिकॉर्ड क्या है। ऐसे में डिजिटल व्यवस्था का पूरा फायदा कर्मचारी तक नहीं पहुंच पाएगा। उनका कहना है कि लंबे समय से आउटसोर्स और अस्थाई कर्मचारी वेतन तथा पीएफ में कथित गड़बड़ी जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। यदि सरकार वास्तव में व्यवस्था को पारदर्शी बनाना चाहती है तो कर्मचारी को भी अपने रिकॉर्ड तक सीधी पहुंच देनी चाहिए। मोर्चा ने अस्थाई कर्मचारियों को भी रोम्स पोर्टल पर शामिल करने की मांग की है। संगठन के मुताबिक सरकारी विभागों में काम करने वाले अस्थाई और आउटसोर्स कर्मचारियों के रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
