
– 15 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति अटकी
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया के बीच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला एक बार फिर प्रशासनिक निर्णय के इंतजार में अटक गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट निर्देश के करीब एक महीने बाद भी सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) सीपीसीटी की अनिवार्यता को लेकर अंतिम फैसला नहीं कर पाया है। इसका सीधा असर प्रदेश के करीब 15 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (सीपीसीटी) बाधक नहीं बननी चाहिए और पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए। इसके बावजूद जीएडी स्तर पर निर्णय लंबित है।
जून-जुलाई में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद चतुर्थ श्रेणी से सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति को लेकर स्थिति साफ नहीं थी। कुछ विभागों ने सीपीसीटी निर्धारित अवधि में पास करने की शर्त पर कर्मचारियों को सशर्त पदोन्नति दे दी। उद्योग संचालनालय, विधि, कृषि, जनसंपर्क और वाणिज्यिक कर सहित कुछ विभागों के ऐसे आदेशों से कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि सीपीसीटी के बावजूद पदोन्नति का रास्ता खुल सकता है। लेकिन 16 जुलाई को जीएडी ने इन आदेशों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ विभागों ने सीपीसीटी से जुड़े प्रावधानों की गलत व्याख्या की है। इसके बाद ऐसे पदोन्नति आदेश निरस्त किए गए और कुछ कर्मचारियों को वापस पुराने पद पर भेज दिया गया।
अब सीएम के निर्देश के बाद भी इंतजार
मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद कर्मचारी संगठनों ने उनसे हस्तक्षेप की मांग की। मप्र राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कराने का अनुरोध किया। इसके बाद 12 अगस्त को मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीपीसीटी परीक्षा के कारण कोई भी पात्र तृतीय या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पदोन्नति से वंचित या रिवर्ट न हो। साथ ही सीपीसीटी की अनिवार्यता को लेकर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने को कहा गया। इसके बावजूद एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी जीएडी की ओर से अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
10 साल बाद मिली पदोन्नति की उम्मीद, फिर अड़चन
प्रदेश में कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया करीब दस साल से रुकी हुई थी। प्रक्रिया शुरू होने के बाद तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी लंबे इंतजार के बाद आगे बढऩे की उम्मीद जगी थी। लेकिन सीपीसीटी की अनिवार्यता ने इस वर्ग के कर्मचारियों के लिए नई अड़चन पैदा कर दी। कर्मचारी समिति का कहना है कि प्रदेश के दूसरे कर्मचारी वर्गों में दूसरी पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अब तक पहली पदोन्नति का भी लाभ नहीं मिल पाया है।
रिक्त सहायक ग्रेड-3 पदों पर पदोन्नति की मांग
कर्मचारी संगठन ने सरकार से सहायक ग्रेड-3 के रिक्त पदों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नत करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की है। कर्मचारियों का तर्क है कि मुख्यमंत्री जब सीपीसीटी को पदोन्नति में बाधक नहीं बनाने के निर्देश दे चुके हैं, तो अब जीएडी को नियमों में आवश्यक संशोधन या स्पष्ट आदेश जारी कर प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। फिलहाल कर्मचारियों की नजर जीएडी के फैसले पर है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद निर्णय में देरी ने दस साल बाद शुरू हुई पदोन्नति प्रक्रिया को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए फिर इंतजार में बदल दिया है।
