
- प्रमोशन में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश पुलिस में प्रमोशन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों पर पुलिस मुख्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। रिव्यू डीपीसी के बाद 78 निरीक्षकों और 83 उप निरीक्षकों के प्रमोशन निरस्त कर उन्हें उनके पुराने पद पर रिवर्ट कर दिया गया है। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने मंगलवार को इससे जुड़े आदेश जारी किए। यह कार्रवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में जारी प्रमोशन सूची के बाद सामने आई करीब 6 हजार शिकायतों की जांच के बाद हुई है। पुलिस मुख्यालय की जांच में अब तक करीब 1100 मामलों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस विभाग में प्रमोशन निरस्तीकरण की कार्रवाई और बढ़ सकती है।
पहली कार्रवाई उन 78 अफसरों पर हुई, जिन्हें इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन दिया गया था। इनमें कई अधिकारी पहले कार्यवाहक निरीक्षक या सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। रिव्यू डीपीसी में सेवा रिकॉर्ड की दोबारा जांच के दौरान सामने आया कि कुछ अफसरों को विभागीय दंड मिल चुका था, जबकि कुछ के खिलाफ आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित थी। नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में पदोन्नति पर रोक का प्रावधान है। जांच के बाद इन सभी 78 अफसरों को वापस सब इंस्पेक्टर पद पर रिवर्ट कर दिया गया है। हालांकि जो अधिकारी पहले से कार्यवाहक इंस्पेक्टर के रूप में काम कर रहे थे, उन्हें आगामी आदेश तक उस पद पर बने रहने की छूट दी गई है।
83 एसआई भी पद से नीचे भेजे
डीजीपी की दूसरी सूची में 83 सब इंस्पेक्टरों को भी रिवर्ट किया गया है। ये अधिकारी एएसआई अथवा कार्यवाहक सब इंस्पेक्टर से एसआई बनाए गए थे। इस कार्रवाई ने प्रमोशन प्रक्रिया में हुई जांच और रिकॉर्ड सत्यापन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पीएचक्यू दूसरे पदों पर जारी प्रमोशन सूचियों की भी समीक्षा कर रहा है।
शिकायतों के बाद खुली पोल
जुलाई में प्रमोशन के लिए यूनिट और जिला स्तर से महज दो दिन की समयसीमा में सूचियां मंगाई गई थीं। इन्हीं सूचियों के आधार पर जल्दबाजी में प्रमोशन आदेश जारी कर दिए गए। इसके बाद गलत प्रमोशन और पात्र पुलिसकर्मियों को पदोन्नति से वंचित किए जाने की शिकायतें पीएचक्यू पहुंचने लगीं। करीब 6 हजार शिकायतें मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले को गंभीरता से लिया और वरिष्ठ अधिकारियों की सात विशेष कमेटियां गठित कर दीं। इन कमेटियों ने शिकायतों से जुड़े पुलिसकर्मियों के सेवा रिकॉर्ड, विभागीय दंड, लंबित जांच और अन्य दस्तावेजों की जांच की।
1100 मामलों में मिली गड़बड़ी
पीएचक्यू सूत्रों के अनुसार जांच में अब तक करीब 1100 मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई पुलिसकर्मियों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पीएचक्यू को लिखकर दिया कि उन्हें प्रमोशन नहीं चाहिए। इससे संकेत मिल रहे हैं कि रिव्यू डीपीसी की कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। जांच पूरी होने के साथ दूसरे पदों पर जारी प्रमोशन आदेशों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
भोपाल से इंदौर तक असर
78 इंस्पेक्टरों की सूची में भोपाल, इंदौर, मुरैना, मंडला, सतना, टीकमगढ़, बैतूल, छतरपुर, खंडवा, भिंड, रीवा, खरगोन, धार, बुरहानपुर, नीमच, उमरिया, शहडोल, ग्वालियर, मंदसौर और बालाघाट समेत कई जिलों के अफसर शामिल हैं। इसके अलावा इंदौर नारकोटिक्स विंग, ग्वालियर पीटीएस और भोपाल पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है।
आगे और खुल सकती है प्रमोशन की फाइल
पुलिस मुख्यालय की यह कार्रवाई फिलहाल 78 इंस्पेक्टर और 83 एसआई तक सीमित है, लेकिन 1100 संदिग्ध मामलों की जांच पूरी होने के बाद तस्वीर और बड़ी हो सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रमोशन सूची तैयार करने से पहले सेवा रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं हुई? अगर विभागीय दंड, लंबित जांच और आपराधिक मामलों की जानकारी रिकॉर्ड में मौजूद थी, तो इन अधिकारियों के नाम प्रमोशन सूची तक कैसे पहुंचे—यह सवाल भी पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही तय करने के लिए अहम हो गया है। रिव्यू डीपीसी के बाद पुलिस महकमे में हडक़ंप है और आने वाले दिनों में प्रमोशन निरस्तीकरण की नई सूचियां जारी होने की संभावना से कई स्तरों पर बेचैनी बढ़ गई है।
