
- 30.77 लाख करोड़ के दावे के बाद अब दूसरी परीक्षा
- निवेश को जमीन पर उतारने पर सरकार का फोकस
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश सरकार अब निवेश के अगले बड़े शोकेस की तैयारी में जुट गई है। भोपाल में जनवरी 2027 में प्रस्तावित दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए सतगढ़ी औद्योगिक क्षेत्र को चुना गया है। समिट की तारीख अभी अंतिम नहीं हुई है, लेकिन 5 जनवरी को इसके आयोजन की संभावना बताई जा रही है। इस बार सरकार की चुनौती सिर्फ बड़े निवेश प्रस्ताव हासिल करना नहीं, बल्कि पिछली समिट में मिले निवेश प्रस्तावों से आगे बढ़ते हुए उन्हें जमीन पर उतारने की तस्वीर भी दिखाना है।
फरवरी 2025 में भोपाल में हुई पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सरकार को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा किया गया था। सरकार के अनुसार इनमें से 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। अब दूसरी जीआईएस में सरकार की नजर इससे बड़ा निवेश लक्ष्य हासिल करने के साथ प्रदेश में तैयार हो रहे नए औद्योगिक क्षेत्रों को निवेशकों के सामने प्रमुखता से रखने पर है।
औद्योगिक क्षेत्र ही बनेगा शोकेस
पहली समिट इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में हुई थी, लेकिन इस बार आयोजन स्थल का चयन सीधे औद्योगिक गतिविधियों से जोडकऱ किया गया है। जंबूरी मैदान, लाल परेड ग्राउंड, नीलबड़-रातीबड़ क्षेत्र, मानव संग्रहालय और सतगढ़ी समेत कई स्थानों का निरीक्षण करने के बाद सतगढ़ी को चुना गया। करीब 172 एकड़ में विकसित हो रहे सतगढ़ी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योगों के लिए जमीन और बुनियादी सुविधाओं के साथ बड़े आयोजन की जरूरतों को पूरा करने की भी गुंजाइश है। बड़ी संख्या में निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पार्किंग, आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध है। इस लिहाज से जीआईएस का आयोजन केवल दो दिन का निवेश सम्मेलन नहीं होगा, बल्कि सरकार सतगढ़ी को प्रदेश के नए औद्योगिक निवेश केंद्र के रूप में भी प्रदर्शित कर सकेगी।
25 एकड़ में 10 हजार क्षमता का कन्वेंशन सेंटर
सतगढ़ी औद्योगिक क्षेत्र में करीब 25 एकड़ में 10 हजार लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन सेंटर प्रस्तावित है। जीआईएस जैसे बड़े आयोजन के लिए यह भविष्य की स्थायी सुविधा के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी सरकार आयोजन के लिए ऐसा स्थान चुन रही है जहां समिट खत्म होने के बाद भी विकसित सुविधाओं का उपयोग औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा सके।
कनेक्टिविटी भी बनी चयन की वजह
सतगढ़ी की लोकेशन को भी आयोजन स्थल के चयन में अहम माना गया है। यहां से राजा भोज विमानतल करीब 25 किलोमीटर और रानी कमलापति रेलवे स्टेशन लगभग 15 किलोमीटर दूर है। प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास भी इसी क्षेत्र से होकर गुजरेगा। देश-विदेश से आने वाले निवेशकों के लिए एयरपोर्ट, रेलवे और सडक़ कनेक्टिविटी को देखते हुए यह स्थान प्रशासन के लिए सुविधाजनक माना जा रहा है।
पहली जीआईएस के आंकड़े अब दूसरी समिट की कसौटी
पहली जीआईएस में 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने के बाद अब दूसरी समिट में उससे ज्यादा निवेश जुटाना सरकार के लिए बड़ा लक्ष्य होगा। हालांकि इस बार केवल निवेश प्रस्तावों की संख्या और रकम ही महत्वपूर्ण नहीं होगी। सरकार को यह भी बताना होगा कि पिछली समिट के दौरान जिन परियोजनाओं के प्रस्ताव सामने आए थे, उनमें कितनी परियोजनाएं वास्तव में शुरू हुईं, कितना निवेश आया और कितने रोजगार पैदा हुए। पहली जीआईएस के बाद सरकार के अनुसार 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर आ चुके हैं। ऐसे में दूसरी जीआईएस को पिछली समिट के एमओयू से प्रोजेक्ट तक के सफर की रिपोर्ट कार्ड के रूप में भी देखा जा सकता है।
सतगढ़ी से निवेश का नया संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 6 जुलाई को सतगढ़ी में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र का भूमिपूजन और शिलान्यास किया था। अब उसी क्षेत्र में देश-विदेश के निवेशकों को बुलाकर सरकार प्रदेश में विकसित हो रहे नए औद्योगिक इकोसिस्टम को दिखाने की तैयारी कर रही है। जनवरी 2027 में प्रस्तावित यह समिट सरकार के लिए दोहरी चुनौती होगी—एक तरफ पिछली जीआईएस के 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से आगे निकलना और दूसरी तरफ यह साबित करना कि निवेश के वादे सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि उद्योग, उत्पादन और रोजगार में बदल रहे हैं।
