जिलों के उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार

  • औद्योगिक कॉरिडोर से ग्लोबल मार्केट तक मप्र की नई रणनीति

गौरव चौहान
मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के छोटे जिलों में तैयार होने वाले स्थानीय उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। स्वतंत्रता दिवस पर लाल परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के नाम अपने संदेश में औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने और निर्यात के लिए नई कार्ययोजना लागू करने की घोषणा की। सरकार का फोकस अब केवल बड़े औद्योगिक निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिलों की स्थानीय उत्पादन क्षमता को निर्यात से जोडऩे पर भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसे अनेक उत्पाद तैयार होते हैं, जिनमें वैश्विक बाजार में जगह बनाने की क्षमता है। इन उत्पादों को ग्लोबल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके साथ ही औद्योगिक कॉरिडोर विकसित कर उत्पादन, परिवहन और बाजार के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने की तैयारी है।
सरकार भोपाल और इंदौर को पहले ही मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित कर चुकी है। अब इन्हें औद्योगिक कॉरिडोर से जोडऩे की दिशा में काम किया जा रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन को नए रिंग रोड नेटवर्क से जोडऩे का काम भी जारी है। सरकार का मानना है कि बेहतर सडक़ कनेक्टिविटी और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से माल परिवहन का समय और लागत कम होगी। इससे प्रदेश के छोटे शहरों और जिलों में बने उत्पादों को बड़े बाजारों और निर्यात केंद्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने ढाई साल में करीब 15 हजार किलोमीटर सड़क निर्माण का दावा भी किया। औद्योगिक कॉरिडोर की योजना में यह सड़क नेटवर्क महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
34 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 10 लाख करोड़ जमीन पर
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में विनिर्माण इकाइयों की संख्या 3.44 लाख से अधिक हो चुकी है। इन इकाइयों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 33.80 लाख युवाओं को रोजगार मिला है। बड़ी औद्योगिक इकाइयों से लगभग 50 हजार युवाओं को रोजगार मिलने का दावा किया गया है। प्रदेश में अब तक 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने की बात कही गई है, जिनमें करीब 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश जमीन पर उतरने का दावा है। सरकार की नई रणनीति इन निवेश प्रस्तावों को रोजगार और निर्यात क्षमता में बदलने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। भोपाल में इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से नया केंद्र स्थापित किया जा रहा है। वहीं 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में आयोजित करने की तैयारी है।
लोक परिवहन सेवा का इंतजार, इंदौर से शुरुआत
स्वतंत्रता दिवस के संदेश में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सरकारी लोक परिवहन सेवा जल्द शुरू करने की बात भी दोहराई। इसकी शुरुआत सबसे पहले इंदौर से प्रस्तावित है। इंदौर में 40 मार्ग अधिसूचित किए जा चुके हैं और सेवा पहले जुलाई में शुरू होने की योजना थी, लेकिन विभिन्न अड़चनों के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। सरकार अब इसे जल्द जमीन पर उतारने की तैयारी में है। प्रदेश में औद्योगिक और शहरी विस्तार के साथ बेहतर सार्वजनिक परिवहन को भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
2027 होगा युवा वर्ष, सात स्तंभों पर रोडमैप
मुख्यमंत्री ने 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की। इसके लिए सात प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित रोडमैप तैयार किया गया है। इसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता एवं स्वरोजगार, सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार, स्टार्टअप सहयोग, खेल-कला-संस्कृति, शोध एवं अनुसंधान तथा नेतृत्व क्षमता विकास पर जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने पर भी है।
12 हजार नए स्टार्टअप और 100 इंक्यूबेशन सेंटर
प्रदेश में वर्तमान में करीब 8 हजार स्टार्टअप संचालित होने की जानकारी दी गई। इनमें लगभग 50 प्रतिशत का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। सरकार अगले ढाई साल में 12 हजार नए स्टार्टअप शुरू कराने और 100 नए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की तैयारी में है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को छोटे शहरों तक विस्तार देने का रास्ता खुल सकता है।
किसानों के लिए मुआवजा, सिंचाई और उपार्जन पर जोर
कृषि क्षेत्र के लिए सरकार ने अधिग्रहित भूमि के लिए चार गुना मुआवजा, उपार्जन की गारंटी और डिफाल्टर किसानों को कवच योजना के माध्यम से राहत देने की बात कही। मुख्यमंत्री के अनुसार ढाई साल में किसानों के खातों में करीब 3 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 12 लाख लीटर दूध की खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ‘लखपति गोपालक दीदी’ योजना और मछली पालन को बढ़ावा देने पर भी जोर है।
बिजली में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य
ऊर्जा क्षेत्र में सरकार ने गर्मी के दौरान अधिकतम मांग के समय करीब 21 हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की बात कही। वर्तमान में कुल बिजली उत्पादन में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई गई है, जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ अब उसके भंडारण पर भी जोर दिया जाएगा। इससे मांग के समय नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नियुक्तियों और नए मेडिकल कॉलेज पर जोर
स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने तीन महीने में 1 हजार नए डॉक्टरों की नियुक्ति किए जाने की जानकारी दी। अगले छह महीने में इतने ही और डॉक्टरों की नियुक्ति का लक्ष्य बताया गया है। सरकार नए मेडिकल कॉलेज शुरू करने के साथ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने की तैयारी में है। आठ आयुर्वेदिक महाविद्यालय शुरू किए जा चुके हैं और नौ नए आयुर्वेदिक कॉलेज शुरू करने की योजना है। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों के तेजी से निराकरण के लिए चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की भी घोषणा की गई है।
पर्यटन में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी
मध्य प्रदेश में बीते साल करीब 14 करोड़ पर्यटकों के आने का दावा किया गया। सरकार पर्यटन को रोजगार और अर्थव्यवस्था के बड़े क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। उड़ान योजना के तहत पांच नए एयरपोर्ट मिलने की बात कही गई है। इंदौर से अबू धाबी के लिए सीधी उड़ान शुरू हो चुकी है। अब भोपाल से शारजाह के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की तैयारी है।
स्थानीय उत्पादन से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिश
सरकार के स्वतंत्रता दिवस संदेश में सामने आए इन लक्ष्यों को एक साथ देखें तो मध्य प्रदेश की विकास रणनीति अब तीन स्तरों पर आगे बढ़ती दिखाई देती है—स्थानीय उत्पादन, बेहतर कनेक्टिविटी और वैश्विक बाजार। औद्योगिक कॉरिडोर, रिंग रोड और मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र जहां बड़े निवेश को गति देने का आधार बनेंगे, वहीं निर्यात कार्ययोजना छोटे जिलों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोडऩे का माध्यम बन सकती है। इसके साथ युवा वर्ष, स्टार्टअप, कौशल विकास, ग्रीन एनर्जी और पर्यटन को जोडकऱ सरकार रोजगार के नए अवसर पैदा करने की कोशिश कर रही है। अब चुनौती इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने की होगी। खासकर निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उद्योगों में बदलना, छोटे जिलों के उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाना तथा परिवहन और निर्यात की लागत कम करना इस पूरी रणनीति की सफलता के लिए निर्णायक होगा।

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