पदोन्नति नियम-2025 पर आज हाईकोर्ट का फैसला संभव

  • सरकार और हजारों कर्मचारियों की निगाहें जबलपुर पर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया का भविष्य सोमवार को तय हो सकता है। मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में सोमवार, 3 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। सुनवाई पूरी हो चुकी है, ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अदालत इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है। इसी कारण सरकार और हजारों कर्मचारी इस सुनवाई पर नजर लगाए हुए हैं।
प्रदेश में करीब एक महीने से नए पदोन्नति नियमों के तहत कर्मचारियों को सशर्त पदोन्नति दी जा रही है। इन पदोन्नतियों को अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया है। 1 जुलाई 2026 से अब तक 50 हजार से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति मिल चुकी है।
सरकार को फैसले की उम्मीद
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकार को उम्मीद है कि अदालत का फैसला उसके पक्ष में आएगा। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन पक्ष रखेंगे। यदि अदालत नए नियमों को वैध ठहराती है तो सभी विभागों में रुकी पदोन्नति प्रक्रिया को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
फैसला प्रतिकूल आया तो सरकार के सामने दो रास्ते
सरकारी सूत्रों के अनुसार यदि हाईकोर्ट पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगाने या नए नियमों को निरस्त करने का आदेश देता है तो सरकार के सामने दो प्रमुख विकल्प होंगे। अदालत के निर्देश के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया रोककर नए नियमों के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को पूर्व पद पर वापस भेजना। हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना। सरकार के लिए दूसरा विकल्प अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है। इससे पदोन्नति प्रक्रिया को जारी रखने का प्रयास किया जा सकेगा और हाल ही में पदोन्नत कर्मचारियों को तत्काल रिवर्ट करने की स्थिति से भी बचा जा सकेगा।
अजय कटेसरिया को रतलाम भेजने पर लगी रोक
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 24 जुलाई को रतलाम कलेक्टर नियुक्त किए गए सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया को अभी तक नया पदभार ग्रहण नहीं करने दिया गया है। पदोन्नति नियम-2025 के मसौदे से लेकर पूरी कानूनी प्रक्रिया तक वे इस मामले के प्रमुख अधिकारी रहे हैं। सरकार चाहती है कि अंतिम निर्णय आने तक वे इसी प्रकरण को संभालें।
2016 से अटकी है पदोन्नति
मध्य प्रदेश में पदोन्नति विवाद पिछले एक दशक से चला आ रहा है। वर्ष 2016 से मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिल सकी। इस दौरान एक लाख से अधिक कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने 17 जून 2025 को मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को मंजूरी दी। इसके बाद सामान्य वर्ग के कुछ कर्मचारियों ने इन नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट में क्या हुआ
7 जुलाई 2025 को पहली सुनवाई में हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। 17 फरवरी 2026 को सभी पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया। इस बीच तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा का सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति हो गई और न्यायमूर्ति विनय सराफ का तबादला इंदौर पीठ हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 1 जुलाई 2026 से सरकार ने कर्मचारियों को कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रखते हुए सशर्त पदोन्नति देना शुरू कर दिया। 13 जुलाई 2026 को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया ने स्वयं को सुनवाई से अलग (रिक्यूज) कर लिया, जिसके बाद इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित की गई। अब 3 अगस्त को होने वाली सुनवाई में फैसले की संभावना जताई जा रही है।
लाखों कर्मचारियों पर असर
हाईकोर्ट का फैसला केवल हाल ही में पदोन्नत हुए 50 हजार से अधिक कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन करीब चार लाख कर्मचारियों के भविष्य को भी प्रभावित करेगा जो अभी भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। निर्णय के बाद प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया की दिशा और गति दोनों स्पष्ट हो जाएंगी।

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