
- यू कोट, वी पे नीति से दूर होगी विशेषज्ञों की कमी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में वर्षों से बनी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए पहली बार यू कोट, वी पे मॉडल लागू करने का फैसला किया है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने के इच्छुक विशेषज्ञ चिकित्सक स्वयं अपना अपेक्षित वेतन बताएंगे। यदि सरकार उनकी योग्यता और अनुभव को उपयुक्त मानती है तो उसी के अनुरूप मानदेय तय किया जाएगा। इसके बदले डॉक्टरों को कम से कम तीन वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देना अनिवार्य होगा। प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों का बड़ा नेटवर्क होने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। सरकार का मानना है कि पारंपरिक भर्ती प्रक्रिया से पर्याप्त विशेषज्ञ नहीं मिल पाए, इसलिए अब बाजार आधारित वेतन मॉडल अपनाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में 10 हजार से अधिक उप स्वास्थ्य केंद्र, 1,400 से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 100 से अधिक सिविल अस्पताल और 52 जिला अस्पताल संचालित हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों के हजारों पद खाली हैं। सबसे अधिक संकट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में है, जहां ग्रामीण आबादी की बड़ी संख्या इलाज के लिए निर्भर रहती है। कुछ दिन पहले हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में बताया गया कि प्रदेश की करीब 72.4 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर है। इन केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 1,171 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 75 विशेषज्ञ डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यानी 90 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1,200 से अधिक पद रिक्त बताए जा रहे हैं, जिन्हें पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना है।
डॉक्टर खुद बताएंगे वेतन
नई व्यवस्था के तहत सरकार विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे बातचीत करेगी और उनसे पूछेगी कि ग्रामीण क्षेत्र में सेवा देने के लिए वे कितना मानदेय चाहते हैं। आपसी सहमति बनने पर उसी आधार पर अनुबंध किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे वर्षों से खाली पड़े विशेषज्ञ पदों पर नियुक्तियां आसान होंगी। दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को केवल बेहतर वेतन ही नहीं, बल्कि कई अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जाएंगी। पीजी प्रवेश में प्राथमिकता और बोनस अंक, दुर्गम क्षेत्र भत्ता। बेहतर आवासीय सुविधाएं और कठिन क्षेत्रों में सेवा का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि आर्थिक प्रोत्साहन और करियर लाभ दोनों मिलकर युवाओं को ग्रामीण सेवा के लिए आकर्षित करेंगे।
