मप्र में आईपीएस कैडर बढ़ाने की तैयारी, 32 नए पदों का प्रस्ताव

आईपीएस कैडर
  • रिटायरमेंट और तबादलों से बदलेगी पुलिस अफसरशाही की तस्वीर

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश पुलिस में आईपीएस अधिकारियों की कमी दूर करने और वरिष्ठ स्तर पर पदोन्नति का रास्ता खोलने के लिए पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने कैडर रिव्यू की तैयारी तेज कर दी है। पीएचक्यू ने राज्य के आईपीएस कैडर में 32 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही गृह विभाग के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
प्रदेश में वर्तमान में 319 स्वीकृत आईपीएस पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 226 पदों पर ही अधिकारी पदस्थ हैं। ऐसे में राज्य सरकार कैडर स्ट्रेंथ में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी चाहती है, ताकि बढ़ते प्रशासनिक दायित्वों के अनुरूप पुलिस नेतृत्व को मजबूत किया जा सके।
प्रमोशन की राह होगी आसान
प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर नए सृजित पदों में से 33 प्रतिशत पद राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) से आईपीएस में पदोन्नत होने वाले अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे। इससे लगभग 10 राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को सीधे आईपीएस कैडर में पदोन्नति का अवसर मिल सकता है। इसके अलावा एसपी, डीआईजी, आईजी, एडीजी और डीजी स्तर पर लंबे समय से पदों की कमी के कारण रुकी पदोन्नतियों को भी गति मिलेगी।
गृह विभाग से होते हुए जाएगा केंद्र
पीएचक्यू की प्रशासन शाखा ने प्रस्ताव की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। पहले इसे गृह विभाग भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। हालांकि, पिछली बार भी राज्य सरकार ने अतिरिक्त पदों का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने केवल आधे पदों को ही मंजूरी दी थी। इसलिए इस बार भी अंतिम स्वीकृति केंद्र के फैसले पर निर्भर करेगी।
तय समय से नौ साल पीछे कैडर रिव्यू
नियमों के अनुसार आईपीएस कैडर रिव्यू हर पांच वर्ष में होना चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश में यह प्रक्रिया लगातार विलंबित रही है। 2003 के बाद पहला रिव्यू 2010 में हुआ। दूसरा 2015 में और तीसरा 2022 में लागू किया गया। इस तरह निर्धारित समय-सारिणी की तुलना में कैडर रिव्यू करीब नौ वर्ष पीछे चल रहा है। वर्ष 2027 के प्रस्तावित रिव्यू को देखते हुए पीएचक्यू ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
प्रतिनियुक्ति से भी बढ़ी कमी
प्रदेश में कार्यरत 226 आईपीएस अधिकारियों में से भी 20 से अधिक अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, दिल्ली स्थित एमपी भवन, परिवहन विभाग, खेल एवं युवक कल्याण विभाग सहित अन्य संस्थानों में पदस्थ हैं। इससे राज्य में फील्ड पोस्टिंग के लिए अधिकारियों की उपलब्धता और कम हो गई है। कैडर रीस्ट्रक्चर न होने का सबसे अधिक असर डीआईजी, आईजी और एडीजी स्तर पर दिखाई दे रहा है। वर्तमान में 2011 बैच के अधिकारी डीआईजी बन चुके हैं, जबकि बाद के बैचों के अधिकारी पद रिक्त न होने के कारण पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
रिटायरमेंट से होगा बड़ा फेरबदल
आईपीएस अधिकारियों की कमी के बीच वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार सेवानिवृत्त होने से पुलिस महकमे में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल की संभावना भी बढ़ गई है। हाल ही में आईजी अरविंद सक्सेना और डीआईजी शशिकांत शुक्ला सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अगस्त माह में चार और वरिष्ठ अधिकारी रिटायर होने वाले हैं, जिनमें डीजी अजय कुमार शर्मा , स्पेशल डीजी आशुतोष राय, एडीजी इंटेलिजेंस ए. साईं मनोहर और  सागर रेंज के आईजी मिथलेश शुक्ला शामिल हैं। इन सेवानिवृत्तियों के बाद फील्ड और पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की जाएंगी। सूत्रों के अनुसार अगस्त के अंत तक आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची भी जारी हो सकती है।

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