मध्यप्रदेश अब टाइगर, चीता और लेपर्ड स्टेट

  • मप्र में नई गणना में बाघों की संख्या 1000 से अधिक होने का अनुमान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी अलग पहचान दर्ज कराई है। अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि आगामी गणना में प्रदेश में बाघों की संख्या 1000 के आंकड़े को पार करने का अनुमान है। सीएम ने कहा-जंगल का राजा बाघ मां दुर्गा का वाहन है। प्रदेश में बाघ, चीता, घडिय़ाल, हाथी और जंगली भैंसे सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है और मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल है। प्रदेश में 53 साल पहले बाघों की संख्या दहाई के आंकड़े में सिमटी हुई थी। 2016 में बाघों की संख्या 250 हो गई। 2022 की गणना में प्रदेश में 785 बाघ हो गए। अगले साल नई गणना में बाघों की संख्या 1000 से अधिक होने का अनुमान है।
एमपी का स्वर्णिम काल
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में समृद्ध जैव विरासत का स्वर्णिम काल निरंतर जारी है। जनभागीदारी, बेहतर वन प्रबंधन और अत्याधुनिक तकनीकों के बदौलत राज्य अपने टाइगर स्टेट के दर्जे को और मजबूत कर रहा है।
उत्कृष्ट कार्य पर सम्मान: राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के सदस्य पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास और पद्मश्री मोहन नागर का अभिनंदन किया गया। वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाली वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों और वन कर्मियों को पुरस्कृत किया गया।
वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन में महिलाओं की अहम भूमिका
मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के मुताबिक, मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल देखने मिली है। वन क्षेत्रों में खासतौर पर टाइगर रिजव्र्स में महिला गाइड व महिला जिप्सी ड्राइवर की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महिलाओं के सीधे तौर पर इन कार्यों से जुडऩे से जहां एक ओर वन संरक्षण को नई ताकत मिली है, तो वहीं दूसरी ओर पर्यटन गतिविधियों से जुडक़र महिलाएं आत्मनिर्भर भी बनी है। इस तरह ये सामुदायिक भागीदारी पर आधारित वन संरक्षण मॉडल टाइगर्स व जंगलों को बचाने के साथ-साथ अवैध शिकार रोकने, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जंगल बढ़े, टाइगर्स बढ़ें और बढ़ी ग्रामीणों की कमाई
मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व के आसपास तकरीबन 95 रजिस्टर्ड होम स्टे चलाए जा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा कान्हा टाइगर रिजर्व में 31, बांधवगढ़ में 24, पन्ना में 16, पेंच में 13 और मढ़ई-सतपुड़ा क्षेत्र में 11 होम-स्टे संचालित किए जा रहे हैं। इसके जरिए ग्रामीण व स्थानीय समुदायों को अच्छी खासी कमाई हो रही है, तो दूसरी ओर वन विभाग और मध्य प्रदेश के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। टाइगर रिजर्व के पास बनाए गए इन होम-स्टे के जरिए पर्यटक गोंड पेंटिंग, बांस शिल्प और टेराकोटा कला सीधे स्थानीय कारीगरों से खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें सीधे कमाई मिल रही है और बिचौलियों की भूमिका भी खत्म हो गई है।

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