मेंटल हेल्थ सेवा आईसीयू में, 4 साल में समीक्षा बोर्ड भी नहीं बने

मेंटल हेल्थ सेवा

प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) सेवाओं की हकीकत सरकारी दावों से उलट है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने इसका खुलासा किया है। राज्य में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 के अधिकांश प्रावधान अब तक जमीन पर लागू ही नहीं हो सके हैं। मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनने वाले मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड (एमएचआरबी) चार साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आए, जबकि राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन भी करीब दो वर्ष सात माह की देरी से हुआ। कैग ने वर्ष 2021-22 से 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार प्राधिकरण प्राधिकरण में 15 में से 11 सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई। न ही मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का पंजीकरण हुआ न ही, राज्य के पास इनका कोई डेटा है। कैग ने पाया कि ग्वालियर और इंदौर सहित जांचे गए जिलों में स्कूली बच्चों के लिए प्रस्तावित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम पूरे नहीं किए गए। ग्वालियर में 20 के बजाय केवल 11 और इंदौर में 18 सत्र आयोजित हुए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि किसी भी छात्र का मनोवैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया गया। अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए।


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