मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी को बड़े अधिकार

  • अब मास्टर प्लान और लैंड यूज बदलाव के फैसले होंगे आसान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल महानगरीय क्षेत्रों के नियोजित विकास को गति देने के लिए मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी को व्यापक अधिकार देने का निर्णय लिया है। नए नियमों के तहत अब इन क्षेत्रों में मास्टर प्लान तैयार करने, बड़े विकास प्रस्तावों को मंजूरी देने और 50 हेक्टेयर से अधिक भूमि के लैंड यूज में बदलाव करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सरल होगी। इससे शहरी विकास परियोजनाओं को मंत्रालय से मंजूरी मिलने में होने वाली देरी कम होगी।
सरकार का मानना है कि नए प्रावधानों से इंदौर, भोपाल, उज्जैन सहित आसपास के जिलों में औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को तेजी मिलेगी तथा नियोजित शहरी विस्तार सुनिश्चित होगा।
विकास प्राधिकरणों को मिली अधिक स्वायत्तता
नए नियम लागू होने के बाद महानगरीय क्षेत्रों के विकास प्राधिकरण कई योजनाओं को बिना मंत्रालय की पूर्व अनुमति के आगे बढ़ा सकेंगे। इससे मास्टर प्लान में आवश्यक संशोधन और नई विकास योजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया सरल होगी। हाल ही में इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने ग्राम निवेश अधिनियम के तहत मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए कई टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) लागू की हैं। अब यही व्यवस्था भोपाल महानगरीय क्षेत्र में भी लागू होगी। सरकार के अनुसार इससे इंदौर, भोपाल, उज्जैन, देवास, धार, रायसेन, सीहोर और शाजापुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे जिलों में आधारभूत ढांचे और शहरी परियोजनाओं को गति मिलेगी।
50 हेक्टेयर से अधिक भूमि के लैंड यूज में बदलाव
नए प्रावधानों के तहत 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली भूमि के लैंड यूज में परिवर्तन की अनुमति मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी दे सकेगी। इसके लिए प्रति हेक्टेयर 25 हजार रुपये शुल्क देना होगा। इसके अतिरिक्त निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार 15 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी जमा करना होगा। हालांकि, लैंड यूज परिवर्तन से पहले सार्वजनिक सूचना जारी कर दावे, सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करना अनिवार्य होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और प्रभावित पक्ष अपनी बात रख सकें।
मास्टर प्लान में भी होंगे संशोधन
नई व्यवस्था के तहत महानगरीय क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार मास्टर प्लान में संशोधन भी अधिक सरलता से किए जा सकेंगे। इससे बदलती आबादी, औद्योगिक निवेश और शहरी विस्तार की जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाओं को समय पर लागू किया जा सकेगा।
बनेगी मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी
तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सरकार इंदौर-उज्जैन और भोपाल में मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी का गठन भी करेगी। इस अथॉरिटी में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जो सड़क, सार्वजनिक परिवहन, ट्रैफिक प्रबंधन और भविष्य की परिवहन परियोजनाओं के लिए एकीकृत योजना तैयार करेंगे।
पारदर्शिता पर रहेगा विशेष जोर
सरकार ने नई व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रावधान किए हैं। यदि अथॉरिटी का कोई सदस्य निजी आर्थिक हित प्राप्त करते हुए पाया जाता है, तो राज्य सरकार उसे पद से हटा सकेगी। सदस्यों को बैठकों में स्वयं उपस्थित होना अनिवार्य होगा। वे अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को अधिकृत नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) आधारित परियोजनाओं में ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि निविदा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रहे।
शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
सरकार का मानना है कि मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी को मिले नए अधिकारों से बड़े शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों में आवास, उद्योग, परिवहन और आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिल सकेगी। इससे निवेश बढ़ेगा, शहरी नियोजन अधिक व्यवस्थित होगा और तेजी से विकसित हो रहे महानगरीय क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक विकास की मजबूत आधारशिला तैयार होगी।

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