
बैतूल-भोपाल फोरलेन में केसला-भौरा-बरेठा के जंगल में चल रहे सडक़ निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि नॉर्मल रोड को यदि हाई स्पीड रोड में तब्दील किया गया, तो इससे न केवल टाइगर जैसे जानवरों का रास्ता रुकेगा, बल्कि उनकी जान भी खतरे में रहेगी। सुनवाई के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। ज्ञात हो कि अमरावती महाराष्ट्र के अद्वेत क्योले की ओर से 2021 में यह जनहित याचिका दाखिल की गई है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग 46 (बैतूल-भोपाल) को फोरलेन में तब्दील करने पर सवाल उठाए हैं। सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने इस पर हैरानी जताई कि पांच साल से मामला लंबित होने के बाद भी नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने जवाब पेश नहीं किया है। बेंच ने कहा कि एनटीसीए ने अपना जवाब देना जरूरी नहीं समझा।
