
देश के संगठित डेयरी क्षेत्र के राजस्व में चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 13 से 15 फीसदी की तेजी का अनुमान है, लेकिन यह चमक आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली करके आएगी। क्रिसिल रेटिंग्स के देश की 37 बड़ी डेयरियों (जिनकी बाजार में 60 फीसदी हिस्सेदारी है) के विश्लेषण के मुताबिक, मांग में किसी भी तरह की कमी नहीं है, लेकिन लागत खर्च में हो रही लगातार बढ़ोतरी कंपनियों के मुनाफे को दबा रही है। अपनी परिचालन लाभप्रदता को 4 फीसदी के दायरे में बनाए रखने के लिए डेयरी कंपनियों के पास खुदरा कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। इस साल दूध की कीमतों में उबाल आने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें जिम्मेदार हैं: क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर शौनक चक्रवर्ती के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति के चलते इस साल पड़ी भीषण गर्मी और सामान्य से कम मानसून का सीधा असर मवेशियों की दूध देने की क्षमता पर पड़ा है। दूसरी वजह है मवेशियों के चारे और रखरखाव पर होने वाले खर्चों में भारी बढ़ोतरी। लागत बढऩे के कारण किसानों से कच्चा दूध खरीदना डेयरी कंपनियों के लिए महंगा हो गया है।
