आधुनिक उपकरणों से फाल्ट की होगी जल्दी पहचान

एमपी ट्रांसको
  • एमपी ट्रांसको ने अपनाई बेयर हैंड और हॉट लाइन तकनीक

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में अब ट्रांसमिशन लाइनों और बिजली उपकेंद्रों के रखरखाव के लिए बार-बार बिजली बंद करने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म होती जाएगी। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने प्रदेश के एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) नेटवर्क के रखरखाव में अत्याधुनिक बेयर हैंड और हॉट लाइन मेंटेनेंस तकनीक को लागू कर दिया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बिजली आपूर्ति चालू रहने के दौरान ही ट्रांसमिशन लाइनों की मरम्मत, इंसुलेटर बदलने और अन्य तकनीकी कार्य किए जा सकते हैं। इससे लाखों उपभोक्ताओं को अनावश्यक बिजली कटौती से राहत मिलेगी और प्रदेश का ट्रांसमिशन नेटवर्क पहले से अधिक भरोसेमंद बनेगा। एमपी ट्रांसको अब पारंपरिक मरम्मत प्रणाली से आगे बढकऱ आधुनिक, तकनीक आधारित रखरखाव मॉडल पर काम कर रहा है। कंपनी का फोकस केवल खराबी आने के बाद उसे ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित फॉल्ट की पहले ही पहचान कर उसे समय रहते दूर करना है। इसी रणनीति का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 99.47 प्रतिशत ट्रांसमिशन सिस्टम उपलब्धता हासिल की, जो मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) द्वारा निर्धारित 98 प्रतिशत के मानक से भी अधिक है।
बड़ी खराबी से पहले ही मिल जाएगा अलर्ट
नई तकनीक का एक बड़ा लाभ यह भी है कि ट्रांसमिशन लाइनों में कमजोर इंसुलेटर, कंडक्टर की खराबी, ढीले कनेक्शन या अन्य तकनीकी समस्याओं की समय रहते पहचान हो जाती है। इससे बड़ी तकनीकी खराबी आने से पहले ही सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो जाती है। कंपनी हटाए गए इंसुलेटरों की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कर उन्हें दोबारा उपयोग में भी ला रही है। इससे रखरखाव की लागत में कमी आने के साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित हो रहा है। ट्रांसमिशन नेटवर्क की निगरानी के लिए एमपी ट्रांसको ने कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग शुरू किया है। अब ड्रोन के जरिए ऊंचे टावरों और दुर्गम क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है, जबकि थर्मल इमेजिंग कैमरे उपकरणों के अधिक गर्म होने या संभावित खराबी का पहले ही संकेत दे देते हैं। इसके अलावा ऑफलाइन फॉल्ट लोकेटर कम सिग्नेचर एनालाइजर, पंक्चर इंसुलेटर डिटेक्टर और हाई वोल्टेज इंसुलेशन टेस्ट मशीन जैसी अत्याधुनिक मशीनों की मदद से उपकरणों की तकनीकी स्थिति का नियमित परीक्षण किया जा रहा है।
बिजली चालू रहते ही होगा मरम्मत कार्य
अब तक ट्रांसमिशन लाइनों की मरम्मत के लिए संबंधित लाइन का शटडाउन लेना अनिवार्य होता था। इससे कई जिलों और शहरों में कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति बाधित होती थी। नई बेयर हैंड और हॉट लाइन मेंटेनेंस तकनीक में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों की मदद से चालू विद्युत लाइन पर ही आवश्यक मरम्मत और रखरखाव कर सकते हैं। इससे बिजली की सप्लाई बिना बाधा जारी रहती है और उपभोक्ताओं को कटौती का सामना नहीं करना पड़ता।
पुराने उपकरण बदले, नेटवर्क हुआ मजबूत
ट्रांसमिशन सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वर्ष 2024-25 में रिप्लेसमेंट एंड रेनोवेशन कार्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में पुराने उपकरणों को बदल दिया गया। इस दौरान 56 सर्किट ब्रेकर, 390 करंट ट्रांसफॉर्मर, 97 पोटेंशियल ट्रांसफॉर्मर, 200 लाइटनिंग अरेस्टर, 79 बैटरी सेट, 50 बैटरी चार्जर, 45 कंट्रोल एवं रिले पैनल और  37 आइसोलेटर का प्रतिस्थापन किया गया। इन बदलावों से ट्रांसमिशन नेटवर्क की कार्यक्षमता, सुरक्षा और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

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