आरक्षक से एसआई तक की भर्ती के लिए बनेगा पुलिस भर्ती बोर्ड

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  • ईएसबी की जगह संभालेगा जिम्मेदारी,10 हजार पुलिस भर्ती से होगी नई व्यवस्था की शुरुआत

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और पूरी तरह पुलिस विभाग के नियंत्रण में लाने की दिशा में सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है। प्रदेश में लंबे समय से प्रस्तावित पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। गृह विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के बीच करीब डेढ़ साल तक चली कवायद के बाद सभी विभागों की सहमति बन गई है। अब जुलाई में होने वाली कैबिनेट बैठक में बोर्ड गठन का प्रस्ताव रखा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही नया पुलिस भर्ती बोर्ड अस्तित्व में आ जाएगा और भविष्य में आरक्षक से लेकर सब-इंस्पेक्टर (एसआई) तक की सभी भर्तियां इसी बोर्ड के माध्यम से कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि अलग भर्ती बोर्ड बनने से पुलिस विभाग को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार समयबद्ध भर्ती करने में सुविधा मिलेगी और वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि डीएसपी और उससे ऊपर के अधिकारियों की भर्ती पहले की तरह मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के माध्यम से ही होगी। पुलिस भर्ती बोर्ड के संचालन के लिए भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में नए मुख्यालय का निर्माण भी किया जा रहा है। यहां परीक्षा संचालन, डिजिटल मूल्यांकन, अभ्यर्थी प्रबंधन, दस्तावेज सत्यापन और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी कार्यों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
ईएसबी की जगह पुलिस करेगा अपनी भर्ती
अब तक प्रदेश में पुलिस आरक्षक और उप निरीक्षक भर्ती परीक्षाओं का आयोजन कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) करता रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह जिम्मेदारी पुलिस भर्ती बोर्ड को सौंप दी जाएगी। इससे पुलिस विभाग को भर्ती प्रक्रिया की पूरी मॉनिटरिंग, परीक्षा आयोजन, परिणाम और चयन प्रक्रिया पर सीधा नियंत्रण मिलेगा। सरकार का मानना है कि अलग भर्ती एजेंसी बनने से भर्ती परीक्षाओं में देरी कम होगी और रिक्त पदों को समय पर भरा जा सकेगा। स्वतंत्रता दिवस 2025 पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में 10 हजार नए पुलिसकर्मियों की भर्ती और पुलिस का अपना भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने बोर्ड गठन का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग ने प्रस्ताव पर कई प्रशासनिक एवं वित्तीय सवाल उठाए। करीब आठ महीने तक लगातार पत्राचार और स्पष्टीकरण का दौर चलता रहा। पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा ने सभी आपत्तियों का जवाब दिया। इसके बाद बोर्ड गठन का अंतिम मसौदा तैयार किया गया, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।
पहली जिम्मेदारी होगी 10 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती
सूत्रों के अनुसार बोर्ड के गठन के बाद सबसे पहला बड़ा काम 10 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करना होगा। प्रदेश सरकार वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व से पहले पुलिस बल के सभी महत्वपूर्ण रिक्त पद भरना चाहती है ताकि कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
200 पदों की मांग, फिलहाल 100 पदों को मंजूरी
पुलिस मुख्यालय ने भर्ती बोर्ड के संचालन के लिए सात आईपीएस अधिकारियों सहित लगभग 200 पदों का प्रस्ताव भेजा था। वित्त विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रारंभिक चरण में इतने बड़े ढांचे पर आपत्ति जताई। अब सहमति बनी है कि पहले चरण में भर्ती बोर्ड के लिए लगभग 100 पद स्वीकृत किए जाएंगे। भविष्य में आवश्यकता और कार्यभार बढऩे पर अतिरिक्त पदों का सृजन किया जाएगा। सरकार पुलिस भर्ती बोर्ड को केवल पुलिस भर्ती तक सीमित नहीं रखना चाहती। प्रस्ताव में यह भी शामिल किया गया है कि भविष्य में अग्निशमन सेवा, जेल विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग और अन्य वर्दीधारी सेवाओं की भर्ती परीक्षाएं भी इसी बोर्ड के माध्यम से आयोजित कराई जा सकें। यदि ऐसा होता है तो मध्यप्रदेश में वर्दीधारी सेवाओं की भर्ती के लिए एक केंद्रीकृत और विशेषज्ञ एजेंसी विकसित हो जाएगी।
दूसरे राज्यों की तर्ज पर नया मॉडल
मध्यप्रदेश भी अब उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की तर्ज पर अपना स्वतंत्र पुलिस भर्ती बोर्ड स्थापित करने जा रहा है। इन राज्यों में अलग भर्ती बोर्ड बनने के बाद पुलिस भर्ती प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक नियमित और समयबद्ध हुई है। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि इसी मॉडल से मध्यप्रदेश में भी भर्ती प्रक्रिया की गति बढ़ेगी और रिक्त पदों को तेजी से भरा जा सकेगा।

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