बार में खुलेगा मनोरंजन का रास्ता

मनोरंजन का रास्ता
  • 111 साल पुराने आबकारी कानून में बड़े बदलाव की तैयारी

गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में जल्द ही आबकारी व्यवस्था का चेहरा बदल सकता है। प्रदेश सरकार ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बने 111 साल पुराने आबकारी कानून में व्यापक संशोधन की तैयारी कर रही है। वर्ष 1915 में लागू किए गए मध्यप्रदेश उत्पाद शुल्क अधिनियम के कई प्रावधान वर्तमान समय में अप्रासंगिक हो चुके हैं। बदलते सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक परिवेश को देखते हुए सरकार अब एक नया और अधिक प्रभावी कानून लाने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर सख्ती से रोक लगाना है। इसके साथ ही बार और लाउंज संस्कृति को नई दिशा देने के लिए लाइसेंस प्राप्त बार परिसरों में डांस, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति देने पर भी विचार किया जा रहा है। वर्तमान कानून में इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध है।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि 1915 में बनाया गया कानून उस समय की परिस्थितियों के अनुरूप था, लेकिन आज शराब कारोबार, तस्करी के तरीके और मनोरंजन उद्योग पूरी तरह बदल चुके हैं। कानून की कई धाराएं ऐसी हैं जिनमें निर्धारित जुर्माने की राशि आज के समय में बेहद कम और अप्रभावी मानी जा रही है। यही कारण है कि सरकार आर्थिक दंड और सजा दोनों को अधिक कठोर बनाने की तैयारी कर रही है। कई मामलों में जुर्माने की राशि 10 गुना तक बढ़ाने पर विचार चल रहा है ताकि अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो सके।
प्रमुख सचिव की समिति तैयार कर रही नया मसौदा
वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव अमित राठौर की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति नए आबकारी कानून का मसौदा तैयार कर रही है। पिछले एक सप्ताह में समिति की छह से अधिक बैठकें हो चुकी हैं। समिति केवल मध्यप्रदेश की परिस्थितियों का ही अध्ययन नहीं कर रही, बल्कि उन राज्यों के कानूनों का भी विश्लेषण कर रही है जहां हाल के वर्षों में आबकारी कानूनों में बड़े बदलाव किए गए हैं। इन राज्यों के सफल प्रावधानों को नए कानून में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
बार में डांस और संगीत पर लग सकता है प्रतिबंध हटने का ठप्पा
वर्तमान उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 38 के तहत लाइसेंस प्राप्त शराब विक्रय परिसर में नाच-गाना, संगीत कार्यक्रम, जुआ या अव्यवस्थित गतिविधियों की अनुमति नहीं है। यदि कोई लाइसेंसधारी ऐसा होने देता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार अब इस धारा में बदलाव कर नियंत्रित और निर्धारित शर्तों के तहत बार परिसरों में संगीत, लाइव बैंड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मनोरंजन कार्यक्रमों की अनुमति देने पर विचार कर रही है। पर्यटन और आतिथ्य उद्योग से जुड़े लोग लंबे समय से ऐसी मांग कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बड़े शहरों में नाइट लाइफ और मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है, साथ ही सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
अवैध शराब कारोबारियों पर होगी बड़ी कार्रवाई
सरकार का सबसे बड़ा फोकस अवैध शराब कारोबार को रोकना है। नए कानून में अवैध शराब निर्माण, परिवहन और बिक्री से जुड़े अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया जा सकता है। वर्तमान में कई मामलों में जुर्माने की राशि इतनी कम है कि अपराधी इसे आसानी से चुका देते हैं। इसलिए सरकार आर्थिक दंड को कई गुना बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
कई धाराओं में हो सकते हैं बड़े बदलाव
जानकारी के अनुसार, कई पुरानी धाराओं में बदलाव किया जा सकता है। जिसमें धारा 34 (1)के तहत अवैध शराब निर्माण, परिवहन, बिक्री या उपकरण रखने पर वर्तमान में एक वर्ष तक की सजा और 5 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। इसे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। धारा 34 (2) के तहत 50 लीटर से अधिक अवैध शराब बरामद होने पर तीन वर्ष तक की सजा और एक लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इस दंड को और कठोर बनाया जा सकता है। धारा 35 के तहत हानिकारक या मिलावटी शराब बनाने पर वर्तमान में दो वर्ष तक की जेल और चार हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। जहरीली शराब की घटनाओं को देखते हुए इस धारा में बड़े बदलाव संभव हैं। धारा 36 के तहत बिना लाइसेंस शराब तस्करी करने वालों के लिए छह माह तक की जेल या एक हजार रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। सरकार इस प्रावधान को भी कड़ा बनाने पर विचार कर रही है।
राजस्व और नियंत्रण दोनों पर नजर
सरकार की कोशिश एक ऐसा कानून बनाने की है जो एक ओर शराब कारोबार को पारदर्शी और नियंत्रित बनाए, वहीं दूसरी ओर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगा सके। बार और होटल उद्योग को आधुनिक सुविधाएं देने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो मध्यप्रदेश का आबकारी कानून स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा बदलाव देख सकता है। इससे न केवल शराब कारोबार की कार्यप्रणाली बदलेगी बल्कि बार, होटल और मनोरंजन उद्योग के लिए भी नए अवसर खुल सकते हैं।

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