
- हाईकोर्ट में फैसला लंबित, फिर भी सरकार ने तेज की प्रमोशन की तैयारी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में पिछले करीब दस वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बार फिर उम्मीद की किरण दिखाई दी है। जबलपुर हाईकोर्ट में पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिका लंबित होने और फैसले के इंतजार के बीच राज्य सरकार ने एक साल बाद फिर से प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 29 जून को मंत्रालय में 19 विभागों के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक का मुख्य एजेंडा मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत विभिन्न संवर्गों के लिए एक्स और वाय मान तय करने पर चर्चा करना है। यह वही प्रक्रिया है, जिसके आधार पर भविष्य में विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें आयोजित करने का रास्ता साफ होगा। सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव कार्यालय ने हाल ही में इस पूरे मामले पर प्रदेश के महाधिवक्ता से कानूनी राय ली थी। महाधिवक्ता ने सरकार को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की सलाह दी है। इसके बाद सरकार ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग से भी औपचारिक परामर्श मांगा है।
एक साल बाद फिर सक्रिय हुआ जीएडी
मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारियां करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तुरंत बाद सामान्य प्रशासन विभाग सक्रिय हो गया और विभिन्न विभागों को बैठक के लिए निर्देश जारी कर दिए। जीएडी ने सभी विभागों से कहा है कि उप सचिव स्तर से नीचे के स्थापना अधिकारी को बैठक में भेजा जाए। बैठक में विभाग अपने-अपने संवर्गों की स्थिति, स्वीकृत पद, रिक्तियां, पदोन्नति की आवश्यकता और एक्स एवं वाय निर्धारण के प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। इन प्रस्तावों के आधार पर शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 में पहली बार एक्स और वाय का प्रावधान किया गया है। इन मानकों के आधार पर आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन बनाते हुए पदोन्नति का निर्धारण किया जाएगा।
नियमों के अनुसार अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रहेगा। अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। एक्स और वाय का मान सामान्यत: 1-1 रहेगा। यदि किसी संवर्ग में अलग मान तय करना होगा तो मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमोदन लेना होगा। यह निर्धारण पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
दस साल से अटकी है पदोन्नति
प्रदेश में वर्ष 2016 से कर्मचारियों की पदोन्नति लगभग ठप है। इसका कारण पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े मामलों का सुप्रीम कोर्ट में लंबित होना रहा। लगातार बढ़ते दबाव और कर्मचारियों की नाराजगी को देखते हुए मोहन सरकार ने 17 जून 2025 को नया मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 लागू किया था। सरकार के इस फैसले के बाद विभागों ने डीपीसी की तैयारियां शुरू कर दी थीं, लेकिन सामान्य वर्ग के कुछ कर्मचारियों ने नए नियमों को चुनौती देते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
पहली सुनवाई में ही लग गई थी रोक
जबलपुर हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को पहली ही सुनवाई में अगली सुनवाई तक पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इसके बाद प्रदेश के सभी 54 विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया ठप हो गई। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद 17 फरवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि फैसला आने से पहले ही मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हो गए, जबकि न्यायमूर्ति विनय सराफ का तबादला इंदौर पीठ हो गया। दोनों न्यायाधीशों के स्थानांतरण के कारण सुरक्षित फैसला घोषित नहीं हो सका। अब इस मामले की सुनवाई नई पीठ के समक्ष दोबारा शुरू होगी।
प्रमोशन की उम्मीद बढ़ी
प्रदेश में करीब 4.50 लाख सरकारी कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति होने पर वरिष्ठ पदों पर रिक्तियां बनेंगी, जिससे कनिष्ठ कर्मचारियों को भी प्रमोशन मिलेगा। वहीं बड़ी संख्या में खाली होने वाले पदों पर नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा, जिससे युवाओं को भी सरकारी नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। 29 जून की बैठक को सरकार की तैयारी का पहला बड़ा संकेत माना जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला हाईकोर्ट के आदेश और सरकार की कानूनी रणनीति पर निर्भर करेगा। यदि कानूनी बाधाएं दूर होती हैं तो प्रदेश में लगभग एक दशक बाद बड़े पैमाने पर पदोन्नतियों का रास्ता खुल सकता है।
