- महिला शक्ति, सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक संदेश का बड़ा प्रयोग
- गौरव चौहान

मध्यप्रदेश भाजपा की बहुप्रतीक्षित नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा के साथ पार्टी ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी रणनीति का स्पष्ट संकेत दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा घोषित 105 सदस्यीय कार्यसमिति में महिला भागीदारी, सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि, कुछ बड़े और चर्चित नेताओं के नाम सूची से बाहर रहने के कारण राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है।
नई कार्यसमिति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं को दिया गया व्यापक प्रतिनिधित्व है। पार्टी ने कुल 105 सदस्यों में से 35 महिलाओं को शामिल कर लगभग 33 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को संगठनात्मक स्तर पर भी मजबूत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। प्रदेश कार्यसमिति में महिला नेताओं को शामिल कर भाजपा ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि संगठन में निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। यह कदम आगामी चुनावों में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर
कार्यसमिति गठन में केवल महिला प्रतिनिधित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक समाज के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर संगठन को समावेशी स्वरूप देने की कोशिश की गई है। मालवा, महाकौशल, बुंदेलखंड, विंध्य, ग्वालियर-चंबल और नर्मदापुरम जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों से नेताओं को शामिल कर क्षेत्रीय असंतुलन की संभावना को समाप्त करने का प्रयास किया गया है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि प्रदेश के सभी 62 संगठनात्मक जिलों की भागीदारी से संगठन की जमीनी पकड़ और मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक को स्थान
नई कार्यसमिति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल सहित कई वरिष्ठ नेताओं को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों तथा संगठन के अनुभवी पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया है। पार्टी ने ऐसे कई नेताओं को भी कार्यसमिति में जगह दी है जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मुख्यधारा की राजनीति में अपेक्षाकृत कम दिखाई दे रहे थे। इससे भाजपा ने अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है।
राज्यसभा और निगम-मंडलों के दावेदारों को भी महत्व
कार्यसमिति में ऐसे कई नेताओं को भी शामिल किया गया है जिनके नाम हाल के महीनों में राज्यसभा, निगम-मंडल या अन्य राजनीतिक नियुक्तियों के लिए चर्चा में रहे थे। इनमें रामपाल सिंह, लता एलकर, गिरीश द्विवेदी, अखंड प्रताप सिंह, ममता गुप्ता और अन्य नेताओं के नाम प्रमुख हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने संगठन में जगह देकर इन नेताओं को सक्रिय बनाए रखने और उनके अनुभव का उपयोग करने की रणनीति अपनाई है।
वर्षों बाद मुख्यधारा में लौटे कई नेता
नई कार्यसमिति में कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल किए गए हैं जो लंबे समय से संगठन की सक्रिय राजनीति से दूर थे। पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष अमरजीत मौर्य, पूर्व विधायक नीता पटेरिया, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वाति गोडबोले और पूर्व मंत्री संजय पाठक जैसे नेताओं की वापसी को संगठनात्मक पुनर्सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। इससे भाजपा ने संकेत दिया है कि संगठन में पुराने कार्यकर्ताओं और अनुभवी नेताओं की उपयोगिता अभी भी बनी हुई है।
कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को भी मिली जगह
कार्यसमिति में उन नेताओं को भी स्थान दिया गया है जो पिछले वर्षों में कांग्रेस छोडकऱ भाजपा में शामिल हुए थे। इनमें पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी का नाम सबसे प्रमुख है। इसके अलावा कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले कुछ पूर्व कांग्रेस नेताओं को भी स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। यह कदम भाजपा की उस रणनीति को दर्शाता है जिसके तहत पार्टी कांग्रेस से आए नेताओं को संगठन में सम्मानजनक भूमिका देकर उनका राजनीतिक उपयोग जारी रखना चाहती है।
स्थायी आमंत्रित सदस्यों में अनुभवी नेतृत्व
भाजपा ने 41 वरिष्ठ नेताओं को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया है। इनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व मंत्री जयंत मलैया, यशोधरा राजे सिंधिया, अनुसुईया उइके, उमाशंकर गुप्ता, अजय विश्नोई, विवेक शेजवलकर सहित कई अनुभवी नेता शामिल हैं। इस व्यवस्था के जरिए पार्टी ने यह सुनिश्चित किया है कि वरिष्ठ नेतृत्व का मार्गदर्शन संगठन को लगातार मिलता रहे।
कई दिग्गजों की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय
जहां कार्यसमिति में कई वरिष्ठ नेताओं को स्थान मिला, वहीं कुछ बड़े नामों की अनुपस्थिति राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, पूर्व सांसद आलोक संजर और पूर्व मंत्री दीपक जोशी जैसे नेताओं को कार्यसमिति में जगह नहीं मिली। विशेष रूप से उमा भारती का नाम सूची में न होना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आश्चर्य का विषय माना जा रहा है। हालांकि पार्टी सूत्र इसे संगठनात्मक पुनर्संतुलन और नई पीढ़ी को अवसर देने की रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं।
जुलाई में होगी पहली बैठक
नई कार्यसमिति की पहली बैठक जुलाई के तीसरे सप्ताह में ओरछा में आयोजित किए जाने की संभावना है। पहले यह बैठक मई में प्रस्तावित थी, लेकिन कार्यसमिति गठन में देरी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब नई टीम के गठन के बाद संगठन आगामी चुनावी और राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेगा।
