- हर शनिवार थानों में होगा संवाद और भ्रमण, 15 लाख विद्यार्थियों से होगा संवाद
- गौरव चौहान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश पुलिस अब कानून-व्यवस्था संभालने वाली पारंपरिक भूमिका से आगे बढकऱ विद्यार्थियों के बीच अपनी छवि बदलने और नई पीढ़ी को जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में काम करेगी। पुलिस, स्कूल शिक्षा विभाग और संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएफपीए के सहयोग से सृजन संवाद अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत प्रदेशभर के 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को कानून, सुरक्षा, अधिकार, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी। खास बात यह होगी कि विद्यार्थियों को केवल कक्षा में जानकारी देने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें पुलिस थानों का भ्रमण कराकर पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर भी दिया जाएगा। पुलिस का लक्ष्य इस अभियान के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के करीब 15 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचना है। कार्यक्रम सभी जिलों में हर शनिवार आयोजित किया जाएगा। शुरुआत में जिला मुख्यालयों के चयनित पीएम श्री, सांदीपनि और एक्सीलेंस विद्यालयों के विद्यार्थियों को इसमें शामिल किया जा रहा है। पायलट चरण के अनुभव के बाद अभियान को जिले के अन्य स्कूलों तक विस्तारित किया जाएगा।
सृजन संवाद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विद्यार्थियों को कानून और नागरिक जिम्मेदारियों की केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं दी जाएगी। पुलिस उन्हें अपने कामकाज की वास्तविक प्रक्रिया से भी परिचित कराएगी। स्कूलों में होने वाले संवाद के साथ विद्यार्थियों को पुलिस स्टेशन का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे पुलिस की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली को समझ सकेंगे। थाने के भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को अपराध नियंत्रण, नागरिक सहायता व्यवस्था, महिला एवं बाल सुरक्षा, अपराधों की जांच, पुलिस की विभिन्न शाखाओं और आपातकालीन सेवाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्हें डायल-112 जैसी आपातकालीन सेवा की कार्यप्रणाली भी समझाई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के मन में पुलिस को लेकर बनी दूरी और झिझक को कम करना है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जब विद्यार्थी पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से देखेंगे और अधिकारियों से सीधे संवाद करेंगे, तो उनके मन में पुलिस को लेकर अधिक सकारात्मक समझ विकसित होगी। इससे पुलिस और समाज के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
पुलिस के साथ शिक्षक भी होंगे संवाद का हिस्सा
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग शाखा ने ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स के माध्यम से चयनित पुलिस अधिकारियों और शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी और शिक्षक विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनकी उम्र और जरूरत के अनुरूप विषयों की जानकारी दी जाएगी। इनमें अधिकार और जिम्मेदारियां, कानून का सम्मान, नागरिक कर्तव्य, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता, न्याय व्यवस्था, पुलिस की भूमिका, सामुदायिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख होंगे। खास तौर पर साइबर सुरक्षा को लेकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच किशोरों को साइबर अपराधों से बचने के उपाय, ऑनलाइन व्यवहार और सुरक्षा संबंधी सावधानियों के बारे में बताया जाएगा।
पुराने तरीके से अलग होगा अभियान
अब तक पुलिस के जनजागरूकता कार्यक्रम मुख्य रूप से स्कूलों और कॉलेजों में जाकर व्याख्यान देने तक सीमित रहे हैं। सृजन संवाद में इस मॉडल को बदलते हुए विद्यार्थियों को पुलिस व्यवस्था से सीधे जोडऩे की कोशिश की गई है। विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस किस तरह कार्रवाई करती है, अपराध की जांच कैसे होती है, नागरिकों की सहायता के लिए कौन-कौन से तंत्र उपलब्ध हैं और किसी आपात स्थिति में पुलिस से किस प्रकार संपर्क किया जा सकता है। महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी भी दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों को पुलिस को केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी के रूप में देखने के बजाय नागरिक सहायता और सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में समझने का अवसर मिलेगा।
18 जिलों में शुरू हुआ पहला चरण
‘सृजन संवाद’ अभियान का पहला चरण 5 अगस्त से शुरू हो चुका है। प्रदेश के 18 जिलों में कार्यक्रम की शुरुआत की जा चुकी है। इनमें बड़वानी, डिंडोरी, मंदसौर, पांढुर्णा, शिवपुरी, आगर-मालवा, रीवा, सीहोर, राजगढ़, सागर, नर्मदापुरम, निवाड़ी, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, शाजापुर और गुना सहित अन्य जिले शामिल हैं। राजधानी भोपाल में अभियान का औपचारिक शुभारंभ 11 अगस्त को किया जाएगा, जबकि इंदौर में 10 अगस्त को कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अभियान को प्रदेश के अन्य स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा।
‘जेन अल्फा’ से संवाद का प्रयास
पुलिस के इस अभियान के पीछे नई पीढ़ी के साथ संवाद स्थापित करने की रणनीति भी है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के दौर में पली-बढ़ी पीढ़ी के साथ पारंपरिक तरीके से संवाद करने के बजाय पुलिस उसके बीच जाकर उसकी भाषा और जरूरतों के अनुरूप संवाद स्थापित करना चाहती है। पुलिस का मानना है कि नई पीढ़ी को यदि समय रहते कानून, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाए तो वह न केवल खुद अपराध और गलत गतिविधियों से बच सकती है, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक कर सकती है।
लक्ष्य सिर्फ जागरूकता नहीं, नागरिक निर्माण
अभियान का अंतिम उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को कानून की धाराएं या पुलिस की कार्यप्रणाली बताना नहीं है। इसके जरिए उनमें कानून के प्रति सम्मान, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस का मानना है कि आज के विद्यार्थी ही कल के नागरिक, पेशेवर, जनप्रतिनिधि और नीति-निर्माता होंगे। इसलिए उनमें शुरुआती स्तर पर कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति समझ विकसित करना लंबे समय में समाज और पुलिस दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
हर शनिवार होगा संवाद
अभियान के तहत प्रदेशभर में प्रत्येक शनिवार विद्यार्थियों के साथ संवाद और गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पहले चरण में चयनित स्कूलों के विद्यार्थियों को जोड़ा जा रहा है। इसके बाद अन्य स्कूलों तक अभियान का विस्तार किया जाएगा। करीब 15 लाख विद्यार्थियों को जोडऩे का लक्ष्य इस पहल को प्रदेश की सबसे बड़ी सामुदायिक पुलिसिंग पहलों में शामिल करता है। पुलिस की नई कोशिश का संदेश साफ है—थाने की दीवारों के भीतर कानून-व्यवस्था संभालने से आगे बढकऱ अब पुलिस स्कूलों और विद्यार्थियों के बीच संवाद के जरिए भविष्य के नागरिकों से रिश्ता मजबूत करना चाहती है।
