
बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश सरकार उस मामले में हाईकोर्ट में घिर गई, जिसमें स्टेट ट्रांसपोर्ट अथोरिटी (एसटीए) का नियमों की अनदेखी कर गठन किया था। परिवहन विभाग की ओर से पेश शपथ पत्र में मोना किं गठन में गलती हुई है। इसमें सुधार के लिए तीन महीने का समय चाहिए। अधिसूचना में संसोधन किया जाना है। विभाग के इस जवाब के बाद हाईकोर्ट की डबल बैंच ने एसटीए के गठन के आदेश पर रोक लगा दी। अब एसटीए बसों के परमिट जारी नहीं कर पाएगा। दरअसल, हरीशंकर सिंह पटेल एवं अन्य द्वारा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा 9 फरवरी 2026 को जारी गजट नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी ने तर्क दिया कि विभाग के अफसरों को लाभ पहुंचाने सरकार ने पूरा ताना-बाना बदला है।
