भाजपा के संगठन पर चुनावी राजनीति भारी

  • प्रदेश अध्यक्ष बनने के 11 महीने बाद भी हेमंत खंडेलवाल अपनी पहली प्रदेश कार्यकारिणी घोषित नहीं कर सके, कार्यसमिति बैठक भी अटकी
  • गौरव चौहान

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में लगातार चुनावी सफलताओं का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक मोर्चे पर अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के पदभार संभालने के करीब 11 महीने बाद भी भाजपा की सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक इकाई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। नतीजतन उनके कार्यकाल की पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक भी अब तक आयोजित नहीं हो सकी है, जबकि पार्टी के संविधान में हर तीन महीने में कार्यसमिति की बैठक आयोजित करने का प्रावधान है।
प्रदेश भाजपा की यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब पार्टी लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा चुनावों में लगातार जीत का दावा कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी व्यस्तताओं ने संगठनात्मक विस्तार और नियुक्तियों की प्रक्रिया को पीछे धकेल दिया है।
चुनाव दर चुनाव टलता गया संगठन विस्तार
पिछले वर्ष सितंबर से ही भाजपा का बड़ा हिस्सा बिहार विधानसभा चुनाव में सक्रिय रहा। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता और संगठन पदाधिकारी बिहार में चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाने में जुटे रहे। बिहार चुनाव खत्म होने के बाद पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों और प्रचार अभियान ने संगठन का पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद पार्टी जीत के उत्सव और राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त रही। इसके तुरंत बाद राज्यसभा चुनाव का दौर शुरू हो गया। भाजपा ने पहले दो सीटों पर उम्मीदवार तय करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को 15 नेताओं का पैनल भेजा। लंबे मंथन के बाद 5 जून को केंद्रीय नेतृत्व ने तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के नामों की घोषणा की। इसके बाद पार्टी तीसरी सीट जीतने की रणनीति में जुट गई और अंतत: तीनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही। अब पार्टी राज्यसभा चुनाव में मिली सफलता का उत्सव मना रही है। ऐसे में प्रदेश कार्यकारिणी गठन का मामला फिर पीछे चला गया है।
कार्यसमिति बैठक का इंतजार
भाजपा संगठन में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को नीतिगत दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा मंच माना जाता है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल की पहली कार्यसमिति बैठक ओरछा में प्रस्तावित है। इस बैठक में आगामी चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और सरकार-संगठन समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होनी है। लेकिन कार्यकारिणी का गठन न होने के कारण बैठक की तारीख तय नहीं हो सकी है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि कार्यसमिति गठन में हो रही देरी से संगठन के भीतर निर्णय प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
मोर्चों में भी अधूरा संगठन
केवल प्रदेश कार्यकारिणी ही नहीं, भाजपा के विभिन्न मोर्चों में भी संगठनात्मक नियुक्तियां अधूरी हैं। युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अनुसूचित जनजाति मोर्चा और पिछड़ा वर्ग मोर्चा समेत अधिकांश मोर्चों की प्रदेश कार्यकारिणी अभी तक घोषित नहीं हुई है। फिलहाल अधिकांश मोर्चे जिला अध्यक्षों की नियुक्ति प्रक्रिया में लगे हुए हैं। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा में अभी भी 25 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है। ऐसे में प्रदेश स्तर की टीमों का गठन भी टलता जा रहा है।
जिला कार्यकारिणी गठन में भी लगा लंबा समय
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जिला कार्यकारिणी गठन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने का प्रयोग किया था। उद्देश्य था कि स्थानीय समीकरणों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए पदाधिकारियों का चयन किया जाए। हालांकि इस प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। कई जिलों में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और स्थानीय नेताओं के बीच सहमति बनाने में महीनों लग गए। कुछ जिलों में पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद भी सामने आए। परिणामस्वरूप जिला संगठन खड़ा करने में ही छह महीने से अधिक का समय निकल गया। भाजपा के भीतर चर्चा है कि कार्यकारिणी गठन केवल चुनावी व्यस्तताओं के कारण नहीं रुका है। प्रदेश कार्यकारिणी में क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वरिष्ठ नेताओं, नए चेहरों, पूर्व पदाधिकारियों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर मंथन चल रहा है। यही कारण है कि अंतिम सूची पर सहमति बनने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
जल्द हो सकती है घोषणा
प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि कार्यकारिणी गठन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और पार्टी अभी विभिन्न आयोजनों में व्यस्त है। उनके अनुसार प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कभी भी की जा सकती है। वहीं भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार का कहना है कि जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पूरी होते ही प्रदेश कार्यकारिणी का गठन कर दिया जाएगा। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा ने भी दावा किया है कि उनके मोर्चे की कार्यकारिणी जल्द घोषित होगी। राज्यसभा चुनाव की सफलता के बाद अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक ढांचे को पूर्ण रूप देना है। आगामी नगरीय निकाय चुनाव, पंचायत चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए पार्टी के लिए मजबूत संगठन खड़ा करना आवश्यक माना जा रहा है। ऐसे में प्रदेश कार्यकारिणी का गठन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की भविष्य की राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बनने जा रहा है।

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