मप्र में बनेगी ‘प्रीमियम एज्ड’ शराब

प्रीमियम एज्ड शराब
  • नई आबकारी नीति से प्रदेश में खुलेंगे हाई-एंड स्पिरिट उद्योग के रास्ते

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार ने शराब उद्योग को नई दिशा देने की तैयारी कर ली है। अब प्रदेश में भी फ्रांस, स्कॉटलैंड, स्पेन, इटली और अमेरिका की तर्ज पर लकड़ी के बैरल में वर्षों तक परिपक्व (एजिंग) की जाने वाली प्रीमियम शराब तैयार की जाएगी। इसके लिए आबकारी विभाग ने मध्यप्रदेश स्प्रिट परिपक्वन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं और चुनिंदा डिस्टलरीज को विशेष लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम केवल शराब उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार इसे प्रदेश में निवेश, निर्यात और प्रीमियम ब्रांड निर्माण के अवसर के रूप में देख रही है। जानकारों का मानना है कि यदि योजना सफल रही तो मध्यप्रदेश देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय मानकों की एज्ड स्पिरिट तैयार होगी।
शराब उद्योग में एजिंग को गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। डिस्टिलेशन के बाद शराब को विशेष लकड़ी के बैरल या कास्क में भरकर महीनों या वर्षों तक रखा जाता है। इस दौरान लकड़ी के प्राकृतिक तत्व शराब में घुलते हैं, जिससे उसका रंग, सुगंध और स्वाद विकसित होता है। स्कॉटिश व्हिस्की, फ्रेंच कॉन्यैक, स्पेनिश रियोजा और इटैलियन रेड वाइन जैसी विश्व प्रसिद्ध मदिराएं इसी प्रक्रिया से तैयार होती हैं। कई प्रीमियम ब्रांड अपनी शराब को 10 से 25 वर्ष तक बैरल में रखते हैं, जिसके कारण उनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच जाती है।
प्रदेश में पहली बार तय हुए मानक
नई नीति के तहत बैरल निर्माण और परिपक्वन प्रक्रिया के लिए स्पष्ट तकनीकी मानक निर्धारित किए गए हैं। शराब को केवल ओक, सागौन (टीक) और साल की लकड़ी से बने बैरल में ही रखा जा सकेगा। किसी भी बैरल की क्षमता 700 बल्क लीटर से अधिक नहीं होगी। हर बैरल पर शराब का प्रकार, भरने की तारीख, क्षमता और संभावित परिपक्वता तिथि अंकित करना अनिवार्य रहेगा। इससे उत्पाद की ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वेयरहाउस में नहीं होगी ब्लेंडिंग और फ्लेवरिंग
आबकारी विभाग ने परिपक्वन प्रक्रिया को पूरी तरह नियंत्रित रखने के लिए सख्त प्रावधान किए हैं। बैरल वेयरहाउस के भीतर शराब की ब्लेंडिंग, फ्लेवरिंग, रंग परिवर्तन या बॉटलिंग जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी। ये सभी प्रक्रियाएं केवल अधिकृत बॉटलिंग रूम में ही की जा सकेंगी। विभाग का मानना है कि इससे परिपक्वन के दौरान किसी प्रकार की मिलावट या अनधिकृत हस्तक्षेप की संभावना समाप्त होगी।
सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम
लंबे समय तक बैरल में रखी जाने वाली शराब की कीमत सामान्य शराब की तुलना में कई गुना अधिक होती है। इसे देखते हुए सरकार ने सुरक्षा संबंधी विशेष प्रावधान किए हैं। वेयरहाउस राष्ट्रीय भवन संहिता और अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए जाएंगे। परिसर में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी होगी और रिकॉर्डिंग कम से कम 90 दिन तक सुरक्षित रखी जाएगी। वेयरहाउस में केवल एक प्रवेश द्वार होगा, जिसमें डबल लॉक सिस्टम लगाया जाएगा। एक चाबी आबकारी अधिकारी और दूसरी डिस्टलरी प्रबंधन के पास रहेगी। इसके अलावा लाइसेंसधारकों को पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी।
फ्रांस से स्कॉटलैंड तक, बैरल शराब का वैश्विक बाजार
विश्व स्तर पर फ्रांस की ओक बैरल में तैयार वाइन और कॉन्यैक सबसे प्रतिष्ठित मानी जाती हैं। बोर्डो, बरगंडी और शैम्पेन क्षेत्र की वाइन अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम श्रेणी में आती हैं। स्कॉटलैंड की सिंगल माल्ट व्हिस्की, अमेरिका की बोरबॉन, स्पेन की रियोजा वाइन, पुर्तगाल की पोर्ट वाइन और इटली की पारंपरिक रेड वाइन भी वर्षों तक बैरल में परिपक्व की जाती हैं। इन उत्पादों की कीमत हजारों डॉलर तक पहुंच जाती है और लग्जरी बाजार में इनकी स्थायी मांग बनी रहती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बैरल के अंदर की लकड़ी को किस स्तर तक टोस्ट या चार किया गया है, यह भी अंतिम उत्पाद के स्वाद और सुगंध को प्रभावित करता है। यही कारण है कि बैरल स्वयं शराब उद्योग की एक महत्वपूर्ण तकनीक और कला मानी जाती है।
निवेश और निर्यात की नई संभावनाएं
आबकारी विभाग को उम्मीद है कि नई नीति के बाद प्रदेश में प्रीमियम स्पिरिट उद्योग का विकास होगा। इससे निजी निवेश आकर्षित होगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी। सरकार की योजना है कि मध्यप्रदेश में तैयार एज्ड स्पिरिट केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बनाए। यदि प्रदेश की डिस्टलरीज गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरीं तो भविष्य में मेड इन मध्यप्रदेश प्रीमियम व्हिस्की और अन्य स्पिरिट ब्रांड वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करते नजर आ सकते हैं।
बदल सकती है प्रदेश की शराब उद्योग की तस्वीर
अब तक मध्यप्रदेश मुख्य रूप से पारंपरिक शराब उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन नई परिपक्वन नीति राज्य को प्रीमियम शराब निर्माण के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है। लकड़ी के बैरल में वर्षों तक परिपक्व की गई शराब न केवल अधिक मूल्य प्राप्त करती है, बल्कि उससे जुड़ा पूरा उद्योग निवेश, पर्यटन, ब्रांडिंग और निर्यात की नई संभावनाएं भी पैदा करता है। यही वजह है कि आबकारी विभाग इस पहल को प्रदेश के शराब उद्योग के लिए एक बड़े बदलाव और दीर्घकालिक आर्थिक अवसर के रूप में देख रहा है।

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