अब कोर ग्रुप तय करेगा… तबादलों के नाम

  • विधायकों और जिला नेताओं की शिकायतों के बाद प्रभारी मंत्रियों की शक्तियों पर अंकुश
  • गौरव चौहान
तबादलों के नाम

प्रदेश में तबादला सत्र के बीच भाजपा संगठन ने जिलों के भीतर होने वाले तबादलों को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब प्रभारी मंत्री अकेले या उनके स्टाफ की सिफारिश पर तबादला सूची अंतिम रूप नहीं ले सकेगी। संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिलों में होने वाले तबादलों के लिए कोर ग्रुप की बैठक में तय किए गए नामों को ही प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हीं के आधार पर अंतिम सूची जारी होगी।
सूत्रों के अनुसार, विधायकों और जिला संगठन पदाधिकारियों की लगातार शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है। सरकार ने तबादलों की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की है और इसी अवधि में प्रदेशभर में बड़ी संख्या में स्थानांतरण प्रस्तावित हैं। जिलों के भीतर होने वाले तबादलों का अधिकार प्रभारी मंत्रियों को दिया गया है, लेकिन अब इस अधिकार पर संगठनात्मक निगरानी भी सुनिश्चित की गई है।
विधायकों की नाराजगी बनी वजह
बताया जा रहा है कि कई विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों की सिफारिशें प्रभारी मंत्रियों को भेजी थीं। वहीं जिला संगठन के पदाधिकारियों ने भी कार्यकर्ताओं और उनके परिजनों से जुड़े मामलों में अनुशंसा की थी। संगठन के समक्ष यह शिकायत पहुंची थी कि कई मामलों में मंत्रियों के स्टाफ द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं को नजरअंदाज कर अपने स्तर पर नाम जोड़े या हटाए जाते हैं। इससे जिला संगठन और विधायकों में असंतोष बढ़ रहा था। कुछ नेताओं ने यह आरोप भी लगाया कि कई बार तबादलों के माध्यम से मंत्रियों के करीबी लोगों को लाभ पहुंचाया जाता है।
कोर ग्रुप की राय होगी निर्णायक
नई व्यवस्था के तहत प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों के कोर ग्रुप की बैठक बुलाने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों में सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी शामिल होंगे। तबादलों से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा के बाद कोर ग्रुप जिन नामों पर सहमति देगा, उन्हीं को अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा। संगठन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय को उचित महत्व मिलेगा। विशेष रूप से विधायकों की अनुशंसाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
मंत्री स्टाफ पर भी उठे सवाल
तबादला प्रक्रिया शुरू होते ही संगठन के पास कुछ मंत्रियों के निजी स्टाफ को लेकर भी शिकायतें पहुंची हैं। नेताओं का आरोप है कि कई जगह मंत्री कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारी संगठन और जनप्रतिनिधियों की बातों को महत्व नहीं देते और तबादलों की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। कुछ मंत्रियों के यहां ऐसे कर्मचारी अब भी कार्यरत बताए जा रहे हैं, जो पूर्व में भी विभिन्न मंत्रियों के स्टाफ में रह चुके हैं। जबकि सरकार और संगठन पहले ही निर्देश दे चुके थे कि लंबे समय से मंत्रियों के यहां पदस्थ कर्मचारियों को स्टाफ में रखने से बचा जाए। हालांकि कुछ मामलों में ऐसे कर्मचारी दोबारा प्रभावशाली भूमिका में लौट आए हैं और तबादलों से जुड़ा कामकाज संभाल रहे हैं।
शुरू हुईं कोर ग्रुप की बैठकें
संगठन के निर्देश के बाद कई प्रभारी मंत्रियों ने अपने निवास पर कोर ग्रुप की बैठकें शुरू कर दी हैं। जानकारी के अनुसार अब तक आधा दर्जन से अधिक मंत्री अपने जिलों के विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं। यह प्रक्रिया 13 जून तक जारी रहेगी। सूत्र बताते हैं कि कई वरिष्ठ मंत्रियों ने अपने स्टाफ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सूची में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करें और कोर ग्रुप द्वारा तय किए गए नामों को ही अंतिम रूप दिया जाए। राजनीतिक दृष्टि से इस व्यवस्था को संगठन द्वारा तबादला प्रक्रिया पर नियंत्रण बढ़ाने और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में तबादलों को लेकर होने वाले विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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