सीमांत सडक़ों और डिजिटल मॉनिटरिंग पर फोकस

  • महाराष्ट्र मॉडल से सीखेगा मध्यप्रदेश
  • गौरव चौहान
सीमांत सडक़ों और डिजिटल मॉनिटरिंग

मध्यप्रदेश में सडक़ और पुल निर्माण को केवल निर्माण गतिविधि तक सीमित न रखकर उसे आर्थिक विकास, पर्यटन, सडक़ सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन से जोडऩे की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। इसी कड़ी में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में विभाग का 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 1 और 2 जून को महाराष्ट्र और गुजरात के अध्ययन दौरे पर गया। इस यात्रा का उद्देश्य अन्य राज्यों के सफल अधोसंरचना मॉडलों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की जरूरतों के अनुरूप लागू करना है।
प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की मेगा सडक़ परियोजनाओं, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का अध्ययन किया। विशेष रूप से सडक़ परियोजनाओं के संचालन, रखरखाव और निगरानी के लिए अपनाई गई तकनीकों ने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया। अब मध्यप्रदेश में भी सडक़ परियोजनाओं की निगरानी और दुर्घटना प्रबंधन के लिए रियल-टाइम इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम तेज हो सकता है।
सीमावर्ती जिलों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
अध्ययन यात्रा के दौरान महाराष्ट्र सरकार और अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोडऩे वाले प्रमुख मार्गों के संयुक्त विकास पर सहमति बनी। तय किया गया कि मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम और महाराष्ट्र राज्य सडक़ विकास निगम सीमावर्ती क्षेत्रों की सडक़ परियोजनाओं के लिए साझा कार्ययोजना तैयार करेंगे। इस पहल से दोनों राज्यों के बीच व्यापार, उद्योग, पर्यटन और माल परिवहन को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से विदर्भ और मध्यप्रदेश के सीमांत जिलों के बीच संपर्क बेहतर होने से आर्थिक गतिविधियों को नया आधार मिल सकता है।
2047 विजन और कोर रोड नेटवर्क से मिले संकेत
महाराष्ट्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में करीब 3.5 लाख किलोमीटर सडक़ नेटवर्क है, जिसे लोक निर्माण विभाग और सडक़ विकास निगम मिलकर संचालित करते हैं। राज्य ने महत्वपूर्ण मार्गों को कोर रोड नेटवर्क के रूप में चिन्हित कर वर्ष 2047 तक चरणबद्ध विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने इस मॉडल का अध्ययन किया ताकि प्रदेश में भी प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर विकसित किया जा सके।
ग्रोथ और टूरिज्म कॉरिडोर पर विशेष रुचि
अध्ययन के दौरान दो अवधारणाओं ने विशेष ध्यान खींचा है। पहला ग्रोथ कॉरिडोर और दूसरा टूरिज्म कॉरिडोर। ग्रोथ कॉरिडोर में ऐसे मार्ग जो उद्योग, कृषि, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देते हैं। बेहतर सडक़ नेटवर्क से लॉजिस्टिक्स लागत कम होती है और निवेश आकर्षित होता है। टूरिज्म कॉरिडोर धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को जोडऩे वाले मार्ग। मध्यप्रदेश में उज्जैन, ओंकारेश्वर, खजुराहो, कान्हा और अन्य पर्यटन स्थलों को देखते हुए इस मॉडल को उपयोगी माना जा रहा है।
समृद्धि महामार्ग का वित्तीय मॉडल बना आकर्षण
बैठक में महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षी समृद्धि महामार्ग परियोजना के वित्तीय मॉडल पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि एसेट सिक्योरिटाइजेशन, वैकल्पिक वित्त पोषण और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त वित्तीय दबाव के पूरा किया गया। मध्यप्रदेश के अधिकारियों ने इस मॉडल का अध्ययन इसलिए किया ताकि भविष्य की बड़ी सडक़ परियोजनाओं के लिए केवल बजटीय संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय नए वित्तीय विकल्पों का उपयोग किया जा सके।
मुख्यमंत्री की विकास दृष्टि को गति
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में बड़े पैमाने पर सडक़, पुल और भवन निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे समय में देश के अग्रणी राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश की परिस्थितियों के अनुरूप लागू करना जरूरी है। यही कारण है कि यह अध्ययन यात्रा प्रदेश की भविष्य की अधोसंरचना रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा से मिले अनुभवों के आधार पर अब मध्यप्रदेश में सडक़ विकास को केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, निवेश संवर्धन, पर्यटन विस्तार और स्मार्ट डिजिटल प्रबंधन के व्यापक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने की तैयारी दिखाई दे रही है।

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