आदिवासी वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर, 3 जून को बनेगी नई रणनीति

आदिवासी वोट बैंक
  • मप्र से 65 आदिवासी प्रतिनिधि होंगे शामिल

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अब अपने पारंपरिक आदिवासी वोट बैंक को साधने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 3 जून को नई दिल्ली में देश भर के आदिवासी नेताओं की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में मप्र से आदिवासी कांग्रेस के 65 प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में विभिन्न राज्यों के आदिवासी समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर व्यापक चर्चा होगी। साथ ही आदिवासियों के लिए संचालित सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत, उनके प्रभाव और इन योजनाओं से वास्तविक लाभार्थियों की स्थिति पर भी मंथन किया जाएगा। कांग्रेस यह समझने की कोशिश करेगी कि जिन क्षेत्रों में कभी उसका मजबूत जनाधार हुआ करता था, वहां अब राजनीतिक समीकरण किस प्रकार बदल रहे हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है, लेकिन पिछले दो दशक में आदिवासी वोटर्स कांग्रेस से छिटक गए हैं और कई क्षेत्रों में भाजपा ने आदिवासी वोटर्स के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। यही वजह है कि पार्टी अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर आदिवासी वोटर कांग्रेस से क्यों दूर हुए और उन्हें दोबारा अपने साथ जोडने के लिए किन मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। दिल्ली में होने वाली बैठक में इस बात की समीक्षा होगी कि विभिन्न राज्यों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों की राजनीतिक स्थिति क्या है? किन सीटों पर कांग्रेस मजबूत है, किन पर संगठन कमजोर पड़ा है?
मप्र में अजजा वर्ग के लिए 47 सीटें आरक्षित
मप्र के संदर्भ में देखें तो हमेशा से आदिवासी प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। प्रदेश की कुल आबादी में अजजा वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है। मप्र में विधानसभा की 230 सीटों में से 47 सीटें अजजा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। यही वजह है कि विधानसभा चुनावों में इन सीटों का प्रदर्शन अकसर सरकार बनने और बिगडने की दिशा तय करता है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 47 में से 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी और वह 15 साल बाद सत्ता में वापस आ गई थी। इस चुनाव में भाजपा को 16 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता था।

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