
मप्र विधानसभा की कृषि विकास समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान का दौरा किया। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन और पराली जलाने की गंभीर समस्या के समाधानों पर एक्सपर्ट और किसानों से विस्तार से चर्चा की। इस दौरान समिति के अध्यक्ष ठाकुरदास नागवंशी ने फसल कटने के बाद बचे अवशेषों को जला देने से पैदा हो रहीं चुनौतियों का उल्लेख करते हुए संस्थानों, नीति-निर्माताओं, उद्योगों और किसानों के बीच समन्वय की जरुरत पर बल दिया। विधानसभा सचिवालय के अपर सचिव उमेश शर्मा ने पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय व स्वास्थ्य दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावी रणनीतियों की जरूरत बताई। संस्थान के निदेशक डॉ. सीआर मेहता ने पराली प्रबंधन में कृषि यंत्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इन-सीटू (खेत में) प्रबंधन के लिए जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर और स्ट्रिप ड्रिल जैसी तकनीकों को प्रभावी समाधान बताया। वहीं एक्स-सीटू (खेत से बाहर) प्रबंधन के तहत बायोमास आधारित विद्युत उत्पादन, एथेनॉल, बायोगैस व बायो-सीएनजी उत्पादन जैसे विकल्प साझा किए। विधायकों ने कई गावों से आए किसानों के नरवाई समस्या पर बात की।
