- 11 बिंदुओं के प्रोफार्मेस से होगा मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन

गौरव चौहान
मप्र सरकार और भाजपा संगठन ने अब मंत्रियों के कामकाज की मॉनिटरिंग को और सख्त करने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री निवास में दो दिन तक चली मंत्रियों की वन-टू-वन समीक्षा बैठक के बाद अब उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट दिल्ली तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश मंत्रियों से भरवाए गए 11 बिंदुओं वाले प्रोफार्मे को लेकर दिल्ली गए हैं, जहां पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ इस जानकारी पर चर्चा होगी। इससे प्रदेश के कई मंत्रियों की बेचैनी बढ़ गई है।
गौरतलब है कि दो दिन तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। पहले दिन 20 मंत्रियों और दूसरे दिन शेष 11 मंत्रियों से चर्चा हुई। बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज, संगठन से समन्वय और प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता का विस्तार से आकलन किया गया। बैठक के दौरान मंत्रियों को एक विस्तृत प्रोफार्मा भरने को दिया गया। इसमें उनसे पूछा गया कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने अपने विभाग में कौन-कौन से नवाचार किए, केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति क्या रही और अगले छह महीनों की उनकी कार्य योजना क्या है। इसके अलावा प्रभार वाले जिलों में उनके दौरे, रात्रि विश्राम, पार्टी कार्यालयों में उपस्थिति, कार्यकर्ताओं से संवाद और जिला कोर कमेटी की बैठकों में भागीदारी जैसी जानकारियां भी मांगी गईं।
कई मंत्रियों की कार्यशैली संतोषजनक नहीं
सूत्रों के अनुसार संगठन कई मंत्रियों की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है। खासकर वे मंत्री जो अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित रूप से नहीं गए या संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहे, उन्हें वन-टू-वन चर्चा के दौरान स्पष्ट चेतावनी दी गई। भाजपा नेतृत्व ने मंत्रियों से कहा है कि नगरीय निकाय चुनाव को देखते हुए वे अभी से अपने जिलों में सक्रियता बढ़ाएं और संगठन के साथ समन्वय बनाकर रणनीति तैयार करें। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि मंत्रियों की यह समीक्षा केवल औपचारिक कवायद नहीं है, बल्कि आने वाले समय में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की भूमिका तैयार कर रही है। हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सार्वजनिक रूप से मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना से इंकार कर रहे हैं, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर चल रही गतिविधियां अलग संकेत दे रही हैं। माना जा रहा है कि आगामी महीनों में मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है और दो से तीन मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर रहा है, वे संगठन की निगरानी में हैं।
अब प्रशासनिक कसावट लाने की तैयारी
इधर मंत्रियों की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब प्रशासनिक स्तर पर भी कसावट लाने की तैयारी में हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा का शेड्यूल तैयार कर रहा है। विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवों को प्रस्तुतीकरण तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा बैठकों में अधिकारी विभागीय योजनाओं की प्रगति, उपलब्धियों, नवाचारों और आगामी ढाई वर्षों के रोडमैप की जानकारी देंगे। सरकार इस प्रक्रिया को केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहती। बैठकों में योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक दक्षता और जमीनी स्तर पर काम की वास्तविक स्थिति की गहन पड़ताल की जाएगी। मुख्यमंत्री विशेष रूप से सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे और जिन विभागों में लक्ष्य के अनुरूप काम नहीं हुआ है, वहां जवाबदेही तय की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले विभागों के नवाचारों को अन्य विभागों में लागू करने पर भी विचार होगा। राज्य सरकार इसे आगामी वर्षों की प्रशासनिक रणनीति तय करने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। सरकार का फोकस अब लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने, योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर रहेगा।
