
हाईकोर्ट ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा-2012 में धोखाधड़ी करने वाले दो दोषियों की सजा के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने दोनों दोषियों की जेल की सजा कम करने से साफ इनकार कर दिया। अभियोजन के अनुसार, 30 सितंबर 2012 को मुरैना के शासकीय कन्या महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान एक फर्जी परीक्षार्थी (सॉल्वर) को ओएमआर शीट भरते हुए पकड़ा गया था। जांच में सामने आया कि मुख्य अभ्यर्थी रणवीर सिंह की जगह हरवेंद्र सिंह चौहान परीक्षा दे रहा था। दोनों को सीबीआइ की विशेष अदालत ने 4 दिसंबर 2025 को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई थी। यह कोई साधारण मामला नहीं है। वास्तविक उम्मीदवार रणवीर सिंह ने अपनी जगह जयपुर के सॉल्वर हरवेंद्र को परीक्षा देने बिठाया। इससे परीक्षा की शुचिता नष्ट होने के साथ ही इसके कारण अयोग्य और अक्षम लोग पुलिस में शामिल हो जाते हैं। पुलिस पर कानून-व्यवस्था बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। अगर यह ड्यूटी अक्षम लोगों के हाथों में सौंप दी जाएगी, तो यह पूरे समाज के लिए बेहद खतरनाक होगा।
