- क्षेत्रीय और संगठनात्मक समीकरण भी साध रही

गौरव चौहान
मप्र में लंबे समय से लंबित निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर अब तेज हो गया है। हालिया आदेशों को देखें तो साफ संकेत मिल रहे हैं कि मोहन सरकार सिर्फ रिक्त पद भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय और संगठनात्मक समीकरण भी साध रही है। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह रणनीति स्पष्ट दिखाई दे रही है। सबसे ज्यादा चर्चा केपी यादव की नियुक्ति को लेकर है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। बाद में सिंधिया के भाजपा में आने के बाद भी यादव उनके खिलाफ कई मुद्दों पर मुखर रहे, हालांकि समय-समय पर दोनों नेताओं को साथ भी देखा गया। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने केपी यादव का टिकट काटकर सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। इसके बावजूद केपी यादव ने बगावती तेवर नहीं अपनाए। उस दौरान केंद्रीय नेता अमित शाह ने उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का संकेत दिया था। अब उन्हें सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने बड़ा संदेश दिया है। गौरतलब है कि पिछले चार दिनों में भाजपा ने अब तक 16 नेताओं को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष नियुक्त कर उन्हें मंत्री दर्जा दिया गया। रविवार को पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को मध्यप्रदेश वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया, तो ग्वालियर के महेन्द्र सिंह यादव को अपेक्स बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।
इनके अलावा उज्जैन, अमरकंटक, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष उपाध्यक्षों की भी नियुक्ति कर दी गई। शासन के विभिन्न विभागों द्वारा रविवार को अलग-अलग चार आदेश जारी किए गए। वन विभाग द्वारा जारी आदेश में पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के संचालक मंडल का अध्यक्ष मनोनीत कर दिया। रावत पहले सरकार के वन मंत्री रहे हैं, लेकिन उपचुनाव हारने की वजह से उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसी तरह सहकारिता विभाग ने ग्वालियर के महेंद्र सिंह यादव को मप्र राज्य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल के प्रशासक पद पर नियुक्त कर दिया। अभी तक यह पद विभाग के प्रमुख सचिव संभाल रहे थे।
यादव का निर्वाचन प्रक्रिया के उपरांत अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा नगरीय प्रशासन विभाग ने अपने तीन आदेश के जरिए रवीन्द्र सोलंकी को उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया, तो मुकेश यादव और रवि वर्मा उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनके अलावा विजय अग्रवाल, अमित श्रीवास्तव, रामचंदख शर्मा, सुशीला जाट, दुर्गा बिलोटिया को उज्जैन विकास प्राधिकरण का सदस्य बनाया गया है। अशोक शर्मा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ग्वालियर के अध्यक्ष होंगे। उनके साथ ही हरीश मेवाफरोश उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। जबकि ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर मधुसूदन भदौरिया को नियुक्त किया गया है। उनके साथ सुधीर गुप्ता, वेदप्रकाश शिवहरे उपाध्यक्ष बनाए गए है। नगरीय प्रशासन के एक अन्य आदेश में राजेंद्र भारती को अमरकंटक विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है।
अब तक इनको मिल चुकी है कुर्सी
सरकार ने सबसे पहले एससी और एसटी आयोग के अध्यक्ष के पद पर क्रमश: रामलाल रौतेल और कैलाश जाटव की नियुक्ति की थी। इन दोनों आयोगों में सदस्यों को भी नियुक्त किया गया है। इसी तरह केशव सिंह बघेल पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, अशोक जादौन ग्वालियर मेला प्राधिकरण, पूर्व सांसद के. पी. यादव नागरिक आपूर्ति निगम संजय नगायच वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और केशव सिंह भदौरिया महाराणा प्रताप बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्ति किये गए है। इनके अलावा उदयवीर सिंह गुर्जर ग्वालियर मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, संजीव कांकर नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष की भी नियुक्ति की गई है। जानकारों के अनुसार इन नियुक्त अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को नियमानुसार कैबिनेट और राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया जाएगा। इधर, भोपाल विकास प्राधिकरण में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति किए जाने की चर्चा दिन भर रही, लेकिन ऐन वक्त पर यहां की नियुक्तियां रोक दी गई। इसी तरह इंदौर और जबलपुर विकास प्राधिकरण में होने वाली नियुक्तियों पर भी अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। जानकारों की मानें तो देवास सहित कुछ और प्राधिकरणों में एक दो दिन में नियुक्यिां की जा सकती है। इधर मध्यप्रदेश महिला आयोग के अध्यक्ष पद की नियुक्ति का मामला भी लंबित है।
