अहमदाबाद में मिली लिथोग्राफी प्रिंटेड 200 साल पुरानी रामायण की पांडुलिपि

भगवान श्रीराम व रामायण से संबंधित पांडुलिपियों को संरक्षित व संग्रहीत करने के लिए देश भर में चल रहा ‘पांडुलिपि संरक्षण यज्ञ’ पूर्णता को प्राप्त करने लगा है। अब अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को अहमदाबाद से रामायण की ऐसी प्राचीन पांडुलिपि को संरक्षित करने का प्रस्ताव मिला है, जो न केवल 18वीं शताब्दी की है, बल्कि इस हस्तलिखित पांडुलिपि की छपाई लिथोग्राफी के माध्यम से हुई है। दो सौ वर्ष पुरानी पांडुलिपि की प्राचीनता का परीक्षण कराकर संग्रहालय इसे स्वीकार करेगा। इसी क्रम में लखनऊ के एक वृद्ध ने भी अपने पास डेढ़ सौ वर्ष पुरानी हस्तलिखित रामचरितमानस उपलब्ध होने का दावा करते हुए संरक्षित करने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री संग्रहालय, नई दिल्ली की ओर से चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत रामकथा संग्रहालय के रिपोजिटरी सेंटर (संग्रहण केंद्र) को अहमदाबाद निवासी महेश पांड्या ने पांडुलिपि देने का प्रस्ताव दिया है। संग्रहण केंद्र के समन्वयक व रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने बताया कि महेश पांड्या ने उनसे वाट्सएप पर संपर्क करके अपने पास 200 वर्ष पुरानी हस्तलिखित रामायण को संरक्षित करने का आग्रह किया है।

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