
- उच्च शिक्षा में होगा बड़ा बदलाव, विभाग ने शुरू की तैयारी
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के कॉलेजों में दो बार प्रवेश का अवसर मिलेगा। नई व्यवस्था में मई से जुन और नवंबर से जनवरी तक दो बार नामांकन प्रक्रिया संचालित की जाएगी। पहले प्रवेश को जुलाई सत्र कहा जाएगा और दूसरे को जनवरी सत्र। कॉलेजों में कक्षाएं एक जुलाई से प्रारंभ होंगी। दूसरे सत्र के लिए नामांकन नवंबर से दिसंबर के बीच लिए जाएंगे। इनकी पढ़ाई जनवरी से शुरू होगी। विभाग ने प्रवेश की यह नीति एमपी बोर्ड की दो बार की परीक्षा को देखते हुए तैयार की है। ताकि विद्यार्थियों की महाविद्यालयों की पढ़ाई बाधित न हो। प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रवेश की नई प्रक्रिया को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
गौरतलब है कि कि मध्य प्रदेश के 1360 सरकारी और निजी महाविद्यालयों के करीब 11.50 लाख छात्र छात्राओं के लिए 5 मई से प्रवेश का पहला चरण प्रारंभ होने की संभावना है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार महाविद्यालयों में नए सत्र से प्रवेश को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप कार्य योजना को अंतिम रूप दे चुका है। इसे जल्द ही शासन से मंजूरी मिलते ही लागू कर दी जाएगी। दोनों बार पंजीयन से लेकर दस्तावेज सत्यापन तक की पूरी पांच चरणों में काउंसलिंग प्रक्रिया ऑनलाइन रहेगी। इस बार पूरी प्रवेश प्रक्रिया व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग दो मुख्य काउंसलिंग पहले चरण और तीन महाविद्यालय लेवल काउंसलिंग सीएलसी चरण निर्धारित किया है।
खराब नहीं होगा विद्यार्थियों का साल
उच्च शिक्षा विभाग दो बार प्रवेश प्रक्रिया को लेकर इसी सप्ताह सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक बुलाई थी। बैठक में प्रवेश प्रक्रिया, शैक्षणिक सत्र के संचालन और अकादमिक कैलेंडर को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा की गई। बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल वर्ष में मई में दूसरी परीक्षा आयोजित कर रहा है। इसलिए उच्च शिक्षा विभाग की मंशा है कि इस दूसरी परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी कॉलेजों की दूसरी नामांकन प्रक्रिया में प्रवेश का मौका दिया जाए। इससे उन विद्यार्थियों का साल खराब होने से बचा सकता है जिन्होंने इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेजों में प्रदेश की उम्मीद में किसी महाविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन नहीं किया। मेडिकल-इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं में असफल होने पर उनका साल खराब होने का खतरा होता है।
