
- 9 जिलों में मिला पिछले साल से भी कम रेवेन्यू, 20 में टारगेट से ज्यादा कमाई
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदेश में चर्ष 2026-27 के लिए मदिरा दुकानों की नीलामी 24 राउंड के बाद अब जाकर पूरी हो चुकी है। नए जिलों और विंध्य क्षेत्र में शराब दुकानों के लिए जबरदस्त होड़ मची रही, वहीं आदिवासी बहुल कुछ जिलों में सरकार को रिजर्व प्राइज (आरक्षित मूल्य) से भी कम कीमत पर संतोष करना पड़ा है। सरकार ने इस बार प्रदेश भर की 3553 शराब दुकानों के ठेकों से 19,952.90 करोड़ कमाने का टारगेट रखा था, हालांकि अंत्तिम दौर की नीलामी के बाद फाइनल आंकड़ा 18,679.39 करोड़ रुपए ही रहा जो टारगेट से 1273.51 करोड़ कम है। अब आचकारी महकमा यह कहकर चचाव कर यहा है कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में शराब ठेकों से सरकार को 16,627.42 करोड़ का रेवेन्यू मिला था, इस बार का राजस्य उससे 12.34 प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों से साफ है कि जहां नए बने जिलों में शराब का कारोचार तेजी से बढ़ा है, मालवा और निमाड़ के कुछ हिस्सों में शराब कारोबार से ठेकेदारों ने दूरी बना ली। इसके कारण सरकार ने अंतिम दौर की बची हुई शराब दुकानों की रिजर्व प्राइज में 45 फीसदी तक की कटौती कर दी थी। इस साल की नीलामी में सबसे चौंकाने वाला पहलू से जिले रहे, जहां शराब ठेकेदारों ने आरक्षित मूल्य के बराबर बोली नहीं लगाई। प्रदेश के 9 जिलों में इस बार पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज हुई। इसमें सबसे ऊपर आलीराजपुर है, यहां 20.02 प्रतिशत की गिरावट दिखी, इस जिले में 141.03 करोड़ के आरक्षित मूल्य के मुकाबले मात्र 94 करोड़ का ही ऑफर मिल सका। आदिवासी बेल्ट के दूसरे जिले झाबुआ में भी सरकार को रिजर्व प्राइज से 15.22 प्रतिशत कम रेवेन्यू मिल सका। रिजर्व प्राइज से कम रेवेन्यू वाले जिलों में रतलाम और नीमच भी हैं, इन जिलों में रिजर्व प्राइज से 8.54 प्रतिशत और 8.89 प्रति, कम पर ठेके आवंटित हुए। मंदसौर में 0.90 प्रति., जबलपुर में 1.05 प्रति., आगर-मालवा में 2.05 प्रति., छिंदवाड़ा में 4.11 प्रति. और शाजापुर में आरक्षित दाम से 7.45 प्रति. कम दर पर विभाग को ठेके देने पड़े।
जिलों में रिजर्व प्राइज से अधिक राजस्व
एक तरफ कई जिलों में शराब ठेकेदारों जे वाइन शॉप की नीलामी से दूरी बना ली थी, वहीं कुछ जिलों में ठेकेदारों के बीच ऐसी प्रतिस्पर्धा रहे कि सरकार के खजाने में उम्मीद से ज्यादा पैसा आया। इसमें तबसे ऊपा मैहर का बान है। महा जो सबको पीते खेड़ते हुए 47 करोड़ आरक्षित मूल्य के मुकाबले 130.16 करोड़ के ऑफर खसिल किए। मंडाला और सीधी जिले में भी पिछले साल के मुकाबले 51.92 प्रतिशत और 50.53 प्रतिशत रेवेन्यू बढ़ गया। सिंगरौली और नवगठित निवाड़ी में भी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 43.06 प्रतिशत और 41.96 प्रतिशत अधिक रेवेन्यू मिला है। बड़े शहरों में शुमार इंदौर में पिछले साल की आद्य में 24.70 प्रतिशत और ग्वालियर में 21.29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबरिक राजधानी मौयल में यह बढ़ोतरी माप्र 1.09 प्रतिशत ही रही।
