
- नगरीय निकायों की फिजूलखर्ची पर सरकार ने लगाई रोक
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र सरकार ने नगर निगम और नगरीय निकायों को आदेश दिया है कि अब वे शहरों में स्वागत द्वार नहीं बनाएंगे। शासन ने यह कदम फिजूलखर्ची रोकने और निकायों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उठाया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने साफ कहा है कि यदि कोई निकाय स्वागत द्वार बनाता है, तो संबंधित अधिकारी को सस्पेंड कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि भोपाल सहित कई शहरों में स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं। भोपाल में फंदा के पास सिक्स लेन सडक़ पर पांच करोड़ की लागत से 30 मीटर चौड़ा सम्राट विक्रमादित्य द्वार बनाया जा रहा है। उज्जैन की साईधाम कालोनी, राजेंद्र नगर, केशव नगर आदि 35 स्थानों पर 6.28 लाख रुपये से स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं। शाजापुर शहर में नगर पालिका द्वारा उज्जैन के महामृत्युंजय द्वार की तर्ज पर 2.90 करोड़ रुपये से एक भव्य स्वागत द्वार का निर्माण किया जा रहा है। खरगोन जिले के महेश्वर में मंडलेश्वर मार्ग पर नगर से एक किमी दूर पर विशाल अहिल्या स्वागत द्वार बनाया गया है। नगर पालिका स्तर के प्रोजेक्ट्स में मप्र के विभिन्न जिलों जैसे देवास और विदिशा में भी स्थानीय निकायों द्वारा 10 लाख से 20 लाख की लागत वाले छोटे स्वागत द्वारों के टेंडर जारी किए गए हैं।
आर्थिक स्थिति सुधारने की चुनौती
प्रदेश के नगर निगम और निकाय वर्तमान में वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में गैर-जरूरी निर्माण कार्य, जैसे स्वागत द्वार बनाना, नगरीय विकास के प्राथमिक लक्ष्यों के विपरीत माना गया है। सरकार का उद्देश्य है कि सार्वजनिक धन का उपयोग सीधे नागरिकों के लाभ और बुनियादी सेवाओं के सुधार में हो।दरअसल, प्रदेश के नगर निगमों व निकायों की माली हालत ठीक नहीं है। इससे उबरने के बजाय निकाय ऐसे निर्माण कार्य कर रहे हैं, जिनसे कोई आय नहीं होती है। इनमें स्वागत द्वार को फिजूलखर्ची का कार्य बताया गया है। अपर मुख्य सचिव ने निकायों को स्वागत् द्वार बनाने के बजाय बुनियादी सुविधाओं, जैसे- सडक़ों, नालियों और शुद्ध पेयजल आपूर्ति जैसी नागरिक सुविधाओं के विकास पर खर्च करने का निर्देश दिया है। हालांकि यह बात अलग है कि जनप्रतिनिधियों और नेताओं का जोर महापुरुषों के नाम पर स्वागत द्वार बनाए जाने पर रहता है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की घोषणा है कि महापुरुषों के नाम पर शहरों के प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे।
बुनियादी सुविधाओं पर फोकस
अपर मुख्य सचिव ने निकायों को निर्देश दिया है कि स्वागत द्वार बनाने की बजाय बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर खर्च किया जाए। इनमें प्रमुख रूप से सडक़, नाली और शुद्ध पेयजल आपूर्ति जैसी सेवाओं का विकास शामिल है। सरकार का मानना है कि इससे नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा। नगर पालिका के अधिकारियों के अनुसार, कंक्रीट या पत्थर के मध्यम आकार के स्वागत द्वार बनाने में लगभग 15 लाख से 20 लाख रुपये खर्च आते हैं। यदि इसमें लाल पत्थर या नक्काशीदार पत्थर का उपयोग किया जाए, तो लागत और बढ़ जाती है। बड़े आकार के स्वागत द्वार बनाने में एक करोड़ रुपये से अधिक का व्यय हो सकता है, जबकि इससे निकायों को कोई आय नहीं होती।
