
- 347 अवैध कब्जों में केवल 50 को हटा पाया प्रशासन
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी के बड़े तालाब के जल भराव क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का अभियान बेहद धीमी गति से चल रहा है। छह अप्रैल से शुरू हुई इस कार्रवाई में अब तक केवल 50 अतिक्रमण (अवैध कब्जे) ही हटाए जा सके हैं, जबकि प्रशासन ने 347 अतिक्रमण चिन्हित किये थे। खास बात ये है कि रसूखदारों के बड़े बड़े अवैध कब्जे अतिक्रमण जस के तस बने हुए हैं। प्रशासन का यह रुख चर्चा में है।
छोटी-छोटी कार्रवाईयां तक सीमित, बड़े कब्जे अभी भी कायम
अब तक की कार्रवाई मुख्य रूप से छोटे और अस्थायी ढांचों तक सीमित रही है। झुग्गियां, गुमटियां टीन शेड और हल्की बाउंड्री वॉल जैसे निर्माणों को हटाया गया है, जबकि बड़े और स्थायी कब्जों पर अब भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखी है। खानूगांव, सेवनिया गोंड, गोरेगांव और टीटी नगर क्षेत्र में बने बड़े गोदाम, कॉलोनियां और अन्य पक्के निर्माण अभी भी खड़े हैं, जो इस अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं।
50 किलोमीटर के दायरे में हैं अवैध कब्जे
सूत्रों के अनुसार, चिन्हित अतिक्रमण लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए हैं, जिनमें कई बड़े निर्माण शामिल हैं। इन पर कार्रवाई न होने के कारण अभियान की रफ्तार और प्रभाव दोनों पर असर पड़ा है। शुरुआती दिनों में पुलिस बल की कमी और विभागों के बीच समन्वय की कमी भी बाधा बनी। हालांकि बाद में कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन वह सीमित दायर में ही सिमटकर रह गई। नियमों के अनुसार वेटलैंड क्षेत्र में 16 मार्च 2022 के बाद हुए निर्माणों पर सीधे कार्रवाई की जा सकती है, फिर भी जमीनी स्तर पर इस प्रावधान का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है।
बारिश में होगी परेशानी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैचमेंट एरिया से अतिक्रमण नहीं हटाए गए, तो बारिश का पानी तालाब तक पहुंचने में बाधा आएगी। इससे बड़े तालाब का जलस्तर घट सकता है और पर्यावरण संतुलन बिगडऩे का खतरा बढ़ जाएगा। पर्यावरणविदों ने पहले ही इस मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपी है, लेकिन उसके अनुरूप प्रभावी कार्रवाई का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए तय समयसीमा में लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नजर आ रहा है।
