- कांग्रेस की पूर्व मंत्री ने खोली अपनी ही सरकार के मंत्रियों की पोल
- गौरव चौहान

देश में इन दिनों महिलाओं को राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर बवाल मचा हुआ है। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम गिर जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस की पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पंचायती राज में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल कर रहे थे, तब प्रदेश की कांग्रेस सरकार ही यह सुनकर हिल गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कैबिनेट के दिग्गज मंत्री विरोध में थे। आज भी महिलाओं को लेकर कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों की सोच वही है। जिन सीटों पर लंबे समय से हार मिल रही हो, वे सीटें महिलाओं को थमा दी जाती हैं। यह सोच बदलना चाहिए। दरअसल, गतदिनों पार्टी के ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मेलन में वरिष्ठ नेताओं के सामने पूर्व मंत्री व विधायक साधौ ने मुखरता से अपनी बात मंच पर रखी। इस दौरान वे न केवल पुराने पन्ने खोलते दिखीं, बल्कि महिला आरक्षण को लेकर अपनी ही पार्टी को घेरते नजर आईं। उन्होंने माना कि कांग्रेस ही नहीं, सभी राजनीतिक दलों की महिलाओं को लेकर सोच यही है। हमारी पार्टी तो फिर भी महिला को बढ़ावा देने का काम कर चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने 1985 में पंचायतों और निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी।
ये दिग्गज थे विरोध में
साधौ का कहना है कि जिस समय स्व. गांधी ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कही थी, तब मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सरकार के दिग्गजों में शामिल सुभाष यादव, अजय मुशरान, राजेंद्र शुक्ला, प्यारेलाल कंवर जैसे दिग्गज विरोध में आ गए थे। इन सभी की सोच थी कि इतनी महिलाएं कहां से आएंगी। प्रदेश में महिलाएं किचन और घूंघट से बाहर नहीं निकलती, 33 प्रतिशत सीटों के लिए महिला उम्मीदवार कहां से लाएंगे। मगर पहले ही चुनाव में इन धुरंधरों की सोच महिलाओं से साबित कर दी थी। डॉ. साधौ ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भाजपा सरकार की मंशा पर भी जमकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भाजपा सरकार संसद में महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन का विधेयक पारित कराना चाहती थी। पिछले चुनाव में भाजपा 400 पार नहीं हो सकी, इसलिए अब यह रास्ता अपना रही है। यदि पूर्ण बहुमत में होती तो यह रास्ता नहीं अपनाती और परिसीमन कराकर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ा लेती और फिर महिलाओं को आरक्षण देती। डॉ. साधौ द्वारा 40 साल पुरानी बातें पार्टी के ही कहकर भाजपा को पलटवार का मौका दे दिया है। भाजपा विधायक और कार्यकर्ता इसे आधार बनाकर कांग्रेस को शुरू से ही महिला विरोधी साबित करने में जुट गए हैं। भाजपा के प्रवक्ता अब संसद में संविधान संशोधन बिल पारित न होने पर डॉ. साधौ की बातों को ही आधार बनाकर कांग्रेस पर हमला करने में जुट गए हैं।
महिलाओं को सिर्फ हारने वाली सीटों पर टिकट
साधौ ने मंच से कहा कि 1985 का दौर राजीव गांधी का था, जिन्होंने महिलाओं और युवाओं को तरजीह दी। उसी दौर में वे स्वयं विधायक बनीं और तब अविभाजित मध्यप्रदेश में 32 महिलाएं चुनकर आई थीं। साधौ ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मंत्रिमंडल का जिक्र करते हुए कहा, मैं सौभाग्यशाली हूं कि उस मंत्रिमंडल की सिपाही थी। जब 33 प्रतिशत आरक्षण की बात आई, तब कैबिनेट में सुभाष यादव, राजेन्द्र शुक्ला, प्यारेलाल कंवर और मुशरान जी जैसे बड़े नाम शामिल थे। ये सभी धुरंधर एक सुर में कह रहे थे कि जो महिलाएं किचन और घूंघट से बाहर नहीं आतीं, उनके लिए 33 प्रतिशत आरक्षण कहां से लाएंगे? साधौ ने आगे कहा कि जब चुनाव हुए तो उन्हीं महिलाओं ने 33 प्रतिशत के मुकाबले 38 प्रतिशत सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई और विरोध करने वालों की भृकुटी तन गई। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रभारी हरीश चौधरी को भी नसीहत दी कि महिलाओं को सिर्फ उन सीटों पर टिकट न थमाएं जहां कांग्रेस सालों से हार रही है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में पूर्व मंत्री डॉ. साधौ द्वारा कहीं गई इन बातों के राजनीतिक मायने भी खोजे जाने लगे हैं। दो दिन से कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश भर से आए नेता उनकी बातों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। जबकि डॉ. साधौ का कहना है कि मैंने महिलाओं के प्रति सोच को लेकर जो बात कही थी वह हर राजनीतिक दल के संबंध में है। यह सोच आज भी कायम है। कांग्रेस सहित सभी दलों में महिलाओं के हिस्से में आमतौर पर वही सीटें आती हैं, जहां पार्टियां लगातार हारती रहती हैं। उन्होंने कांग्रेस का नसीहत दी है कि आगामी चुनावों में संगठन को अपनी सोच बदलना चाहिए। चुनौतीपूर्ण सीटों से उतारने की बजाय सुरक्षित और जिताऊ सीटों पर भी मौका देना चाहिए।
