- कमजोर सीटों के लिए भाजपा ने बनाई मिशन 2028 के लिए रणनीति
- गौरव चौहान

मप्र में विधानसभा की सभी 230 सीटें जीतने का लक्ष्य तय कर भाजपा ने मिशन 2028 के लिए रणनीति बनाई है। इसके तहत भाजपा कमजोर सीटों पर सबसे अधिक फोकस करेगी। अपनी इस रणनीति के तहत ऐसी करीब 70 सीटों को चिह्नित कर भाजपा न सिर्फ संगठनात्मक गतिविधियों को अभी से बढ़ा दिया है बल्कि इन क्षेत्रों में मंत्रियों को भी तैनात करने का निर्णय लिया है। पार्टी की रणनीति के अनुसार कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी मंत्रियों को देकर उन्हें वहां निरंतर रात बिताने और बैठकें करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें हार के कारणों का अध्ययन करने और उन्हें दूर करने के लिए मजबूत रणनीति बनाने को कहा गया है। ऐसी कई सीटों पर कांग्रेस अपने जिन दिग्गज नेताओं के प्रभाव के कारण मजबूत है, उनका किला भी भेदने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
मप्र भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ है। वहीं कांग्रेस भी अन्य राज्यों की अपेक्षा मजबूत है। ऐसे में भाजपा ने राज्य की उन विधानसभा क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, जहां भाजपा कमजोर है या फिर वहां विपक्षी दल का विधायक लगातार चुनाव जीत रहा है। इसके लिए जिलों के प्रभारी मंत्रियों को विधानसभा मुख्यालयों में रात्रि बिताने एवं वहां चौपाल लगाने को कहा गया है। गौरतलब है कि भाजपा ने पिछले दिनों एक आतंरिक सर्वे के बाद अपनी ऐसी लगभग 70 विधानसभा सीटों को चिह्नित किया है, जहां पर उनका जनाधार पहले से नीचे गिरा है। जिसे निकाय और त्रि स्तरीय पंचायती राज चुनावों से पहले सुधारने के लिए रणनीति तय कर दी है।
कमजोर सीटों पर मंत्री करेंगे रतजगा
जानकारों की मानें तो मंत्रियों से कहा गया कि वे जब भी अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करें, तो सरकारी कामकाज निपटाने के बाद कमजोर हो चुकी विधानसभा सीट मुख्यालय में एक रात रुकें और वहां रात्रि में सभाएं या चौपाल लगाकर लोगों को बताएं कि किस तरह से भारतीय जनता और उसकी सरकार जनता के हितों को लेकर काम कर रही है। इधर भाजपा संगठन को भी सक्रिय किया गया है। प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग प्रभारी एवं जिला प्रभारियों को टाइम लाइन थमा दी गई है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जनता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने की बात कही गई है। पार्टी ने अपनी इस नई गाइडलाइन के तहत प्रदेशाध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से कहा है कि वे प्रत्येक महीने के शुरुआती 10 दिनों में मैदानी दौरे और जिला स्तरीय बैठकों में शामिल होंगे। महीने के पहले सप्ताह में संगठन और पदाधिकारियों का पूरा फोकस मंडल स्तर पर रहेगा। इस दौरान मंडल की बैठकें आहुत की जाएगी, जिसमें मंडल अध्यक्ष, मंडल पदाधिकारी, मंडल मोर्चा अध्यक्षों व वार्ड संयोजकों के साथ समन्वय स्थापित होगा। वहीं हर माह के मध्य में 11 से 20 तारीख के बीच प्रदेश स्तरीय बैठकें और वरिष्ठ पदाधिकारियों का प्रवास रहेगा। महीने के चौथे सप्ताह में पार्टी की विशिष्ट इकाईयों और शक्ति केन्द्रों पर ध्यान दिया जाएगा। जिसमें मन की बात और बूथ समिति की बैठक का एजेण्डा निर्धारित किया जाएगा। शक्ति केन्द्र टोली की बैठकों के बाद टिफिन बैठकों का आयोजन किया जाएगा। बताया गया है कि यह रोडमैप दो महीने के रोटेशन के आधार पर हर महीने 50 प्रतिशत मंडलों में आयोजित की जाएंगी।
बहुआयामी माइक्रो-प्लानिंग रणनीति तैयार
भाजपा ने इन कठिन सीटों के लिए मिशन-2028 के तहत एक बहुआयामी माइक्रो-प्लानिंग रणनीति तैयार की है। बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर प्रभावी जाति समूहों एससी-एसटी व अन्य को साधने के लिए नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। मंत्रियों की तैनाती भी इन कठिन सीटों पर की गई है। संगठन के दिग्गज मंत्रियों और कोर ग्रुप के सदस्यों को प्रभारी बनाया गया है ताकि वे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा जीत सकें। वहीं भाजपा की नई रणनीति तो लेकर पार्टी मुख्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक हुई, जिन्हें गाइललाइन के मुताबित टारगेट सौंपे गए। बैठक को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर ज्यादा और मेहनत करनी होगी। जब तक हम सब मिलकर पार्टी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक जुट होकर काम नहीं करेंगे, तब तक हमारी योजनाओं में सफलता नहीं मिल सकती। हमें समाज के हर वर्ग से संवाद बढ़ाना होगा। प्रदेशाध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी की सफलता कार्यकर्ताओं की मेहनत, निष्ठा और एकजुटता पर निर्भर करती है। हमारी सरकार और संगठन की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना होगा।
